जयपुर में 14 मई के हादसे में ऑक्सीजन के कम दबाव (Low pressure) से नहीं हुई किसी की मौत, बीमारी रही मुख्य वजहः आरयूएचएस

शनिवार, 15 मई की सुबह राजस्थान में यह बड़ी खबर थी कि राज्य में कोविड पीड़ित मरीजों के उपचार के सबसे बड़े अस्पताल राजस्थान स्वास्थ्य विश्विद्यालय, आयुर्विज्ञान (आरयूएचएस) में 14 मई को दो मिनट ऑक्सीजन रुकने से तीन लोगों की मौत हो गई। यदि एक मिनट और ऑक्सीजन नहीं मिलती तो मौतों की संख्या 30 हो सकती थी। इसके बाद राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा के निर्देश पर इन 3 मरीजों की हुई मौत के कारणों की जांच करवाई गई। आरयूएचएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह, डॉ. पी.एस. लाम्बा, डॉ. पवन सिंघल, डॉ. वेदपाल सिंह व डॉ. हेमेंद्र भारद्वाज वाली पांच सदस्यीय समिति ने जांच के बाद बताया कि मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी नहीं बल्कि गंभीर बीमारी ही थी।

सामान्य था ऑक्सीजन का दबाव

आरयूएएचएस के अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि आक्सीजन का दबाव सामान्य था। इन मरीजों की मौत के वक्त आरी/सारी में 24 मरीज वेंटीलेटर या आक्सीजन सपोर्ट पर थे। आरयूएचएस में 200 मरीज वेंटीलेटर पर,  60 मरीज एचएफएनसी पर तथा 442 मरीज आक्सीजन लाइन पर थे। यदि आक्सीजन का दबाव कम होता तो सभी मरीजों पर इसका प्रभाव पड़ता।

जिन तीन मरीजों की मौत हुई, वे बेहद गंभीर थे

उन्होंने बताया कि जिन तीन मरीजों की मौत हुई वो तीनों मरीज बहुत गंभीर थे, चिकित्सक व स्टॉफ उन्हें कई दिनों से बचाने का प्रयास कर रहे थे। एक मरीज के परिजन ने जब आक्सीजन सेचुरेशन में उतार-चढ़ाव देखा तो वह घबरा गया और उसने शोर मचाना प्रारंभ कर दिया। मरीजों की गंभीर स्थिति देखते हुए वहां मौजूद स्टॉफ व चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया। उनके लिए अतिरिक्त आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भी की गई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। आरयूएचएस प्रभारी ने कहा कि उक्त घटना की पूर्ण जांच की गई है और जिम्मेदारों से लिखित में पूरी रिपोर्ट प्राप्त की गई है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि 14 मई को हुई तीन मरीजों की मौत आक्सीजन का दबाव कम होने से नहीं हुई है।