अब स्कूल में घुसा पेंथर, 3.30 घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू

जयपुर

जयपुर। राजधानी से क़रीब 40 किमी दूर बस्सी के तूंगा थाना इलाके के बिहारीपुरा रेजिडेंशियल स्कूल में शुक्रवार सुबह एक लेपर्ड घुस गया। लेपर्ड को चहलकदमी करते देख स्कूल के स्टाफ और छात्रों में दहशत फैल गई। स्कूल की ओर से सुबह 8.30 बजे लेपर्ड घुसे होने की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी गई।

लेपर्ड की सूचना मिलने पर जयपुर ज़ू से एक्स्पर्ट्स की टीम को मौक़े के लिए रवाना किया गया। क़रीब 3.30 घंटे की मशक़्क़त के बाद लेपर्ड को 11.45 बजे रेस्क्यू कर लिया गया।

सूचना पर रेस्क्यू के लिए वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर अशोक तंवर, सहायक वनपाल सुरेश चौधरी, राजेंद्र सिंह की टीम ने क़रीब पाँच साल के नर लेपर्ड को रेस्क्यू किया। लेपर्ड को पिंजरे में डालकर रेंज कार्यालय लाया गया। लेपर्ड के होश में आने के बाद उसे दोबारा झालाणा के जंगलों में छोड़ गया। लेपर्ड भोजन की तलाश में इसी जंगल से निकलकर तूंगा तक पहुंच गया था।

इससे पहले भी कई बार जयपुर के अलग-अलग इलाकों में पैंथर घुसने के मामले सामने आ चुके हैं। पैंथर भोजन पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर आबादी क्षेत्रों में आ जाते हैं।

क्या भोजन की हो रही कमी?
क्या झलाना के जंगलों में बघेरों के लिए भोजन की कमी हो रही है? उल्लेखनीय है कि बघेरों के मुख्य भोजन में छोटे जंगली जीव व बड़े पक्षी आते हैं। इनमें हिरन, चीतल, बारहसींगा, खरगोश, बंदर, कुत्ते, मोर आदि प्रमुख हैं। झालाणा के जंगल में हिरन, चीतल, बारहसींगा की बेहद कमी है। शिकार के चलते अब जयपुर के आस—पास के जंगलों में खरगोश भी समाप्ति की ओर हैं। शेष बचे मोर और बंदर का शिकार बघेरे के लिए आसान काम नहीं होता है। ऐसे में बघेरे आसान शिकार कुत्तों, भेड़—बकरियों और गाय व भैंस के छोटे बछड़ों के शिकार के लिए अक्सर जंगल से बाहर निकल जाते हैं।

फूड चेन दुरुस्त करे वन विभाग
वन विभाग जंगली जानवरों का ध्यान रखने के बजाए उनसे पैसे कमाने में लगा है। झालाणा में लेपर्ड सफारी संचालित ​की जा रही है। वन​ विभाग भविष्य में गलता वन क्षेत्र और नाहरगढ़ अभ्यारण्य में भी लेपर्ड सफारी शुरू करने जा रहा है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि वन विभाग यह सफारी शुरू करने से पहले जयपुर के आस—पास के जंगलों में बघेरों की फूड चेन को दुरुस्त करने का प्रयास करे।

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