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‘प्रार्थना करो कि मुझे गुस्सा न आये’..ऐसी धमकी देने वाले शाहजहां शेख के तार जुड़े हैं TMC और ममता बनर्जी से,जानें पूरा कच्चा चिठ्ठा

पश्चिम बंगाल में छापेमारी करने गई प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हुए जानलेवा के हमले के बाद से सियासी उबाल आया हुआ है। यहाँ तक कि इस घटना पर एक दूसरे के कट्टर सियासी प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस , ममता सरकार के खिलाफ एक पाले में नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ इस घटना के बाद से आरोपी टीएमसी नेता शाहजहां शेख हमले के बाद से फरार चल रहा है। आरोप है कि उसी के उकसावे पर ईडी के अधिकारियों और सीआरपीएफ के जवानों पर लगभग 800 से 1000+ की संख्या में लोगों ने हमला बोला।
एजेंसी ने अब उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। ईडी ने इस नोटिस को सभी हवाई अड्ने और बीएसएफ के साथ भी साझा किया है।
क्या है मामला
दरअसल, शुक्रवार को शेख घर छापा मारने पहुंची ईडी की टीम पर जानलेवा हमला हो गया था। घटना के वक्त अधिकारियों के साथ सीआरपीएफ के 27 जवान भी मौजूद थे। लेकिन 800-1000 की संख्या के आगे वो असहाय थे। टीएमसी कार्यकर्ताओं के हमले में तीन अधिकारी जख्मी हो गए। इसके अलावा उनकी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई थी।
कौन है शाहजहां शेख
केंद्रीय एजेंसी ईडी और दो दर्जन से अधिक सीआरपीएफ जवानों पर जानलेवा हमला करवा कर शाहजहां शेख राष्ट्रीय मीडिया में कुख्यात हो चुका है । उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली ब्लॉक का रहने वाला शेख इलाके का दबंग टीएमसी नेता है। चार भाई बहनों में सबसे बड़े रहे शेख ने मछली फॉर्म और ईंट भट्ठे के एक श्रमिक के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद 2004 में वह ईंट भट्ठा श्रमिक यूनियन का नेता बन गया। इस प्रकार तत्कालीन सत्तारूढ़ सीपीएम से उसके सियासी सफर का आगाज हो गया।
बंगाल की राजनीति में जब सीपीएम अपने आखिरी सांसे गईं रही थी और तृणमूल कांग्रेस एक नई ताकत के रूप में उभर रही थी तो उसने भी अपनी निष्ठा बदल ली। वह जेल में बंद टीएमसी नेता ज्योतिप्रिय मलिक के नेतृत्व में पार्टी में शामिल हो गया। मलिक उत्तर 24 परगना जिले के पार्टी अध्यक्ष भी हैं। मलिक के मंत्री बनते ही उसका भी सियासी रसूख बढ़ गया। 2018 के पंचायत चुनाव में वह जीतकर सरबेरिया अग्रघाटी ग्राम पंचायत के उप प्रमुख बना। पिछले साल हुए चुनाव में वह जीतकर जिला परिषद बना। वर्तमान में वह संदेशखाली का टीएमसी अध्यक्ष भी है।
बाहुबली/भाई के नाम से जाना जाता है शाहजहां अपने इलाके में
मजदूर से राजनेता बना शाहजहां शेख राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से काफी सशक्त बताया जाता है। उसका इलाके में मछली पालन का बड़ा कारोबार है। इसके अलावा उसने कई एकड़ जमीन और मकानें भी खड़ी कर ली हैं। इलाके के कुछ लोग उसे बाहुबली तो कुछ भाई कहते हैं। शेख की गिनती बंगाल में टीएमसी के बाहुबली नेताओं में होती है। राशन घोटाले में जेल में बंद पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक का करीबी होने के कारण वह भी ईडी के रडार पर है। बताया जाता है कि घोटाले का एक बड़ा हिस्सा उसके पास भी आया था, इसलिए ईडी उससे पूछताछ करना चाहती है।
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद संदेशखाली में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्तओं के बीच भयानक हिंसा देखने को मिली थी, जिसमें दोनों पक्षों के लोग मारे गए थे। भाजपा नेताओं ने इसके पीछे भी शाहजहां शेख को जिम्मेदार ठहराया था। उनके खिलाफ एफआईआर भी हुई। सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी समेत कई प्रभावशाली टीएमसी नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें है, जो राज्य में उसके सियासी रसूख को दर्शाता है।
ये थी बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं को दी गयी धमकी
बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने शाहजहां शेख का एक वीडियो शेयर किया है, जो कि एक जनवरी 2024 का बताया जा रहा है। वीडियो टीएमसी के किसी कार्यक्रम का है। जिसमें वह ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को लेकर खुलेआम स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को धमकाते नजर आते हैं। बंगाली भाषा में शेख कहते हैं सीबीआई और ईडी उनका ‘बाल’ भी नहीं छू पाएंगे। आगे वो कहते हैं कि प्रार्थना करो कि मुझे गुस्सा न आए नहीं तो वो बीजेपी नेताओं ओर कार्यकर्ताओं का दांत तोड़ देंगे। 2024 के चुनाव के बाद तब टीएमसी का सरकार पर पूरा नियंत्रण हो जाएगा तो उनके शरीर की खाल उधेड़ देंगे।

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