जयपुर

आम आदमी पार्टी के जरिए 11वीं शताब्दी का इतिहास पंजाब के बाद राजस्थान में दोहराया जाएगा

कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ताओं और असंतुष्ट नेताओं की दलबदल की दौड़ शुरू होगी आप की तरफ, जनता भी तीसरे विकल्प के प्रति उत्साहित

जयपुर। कहा जाता है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। यही कुछ भारत की राजनीति में नजर आ रहा है। कुछ मु_ीभर सैनिकों की बदौलत मुस्लिम आक्रांताओं ने भारत के लंबे-चौड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था और सैंकड़ों वर्षों तक यहां राज किया। आक्रांताओं का यह इतिहास फिर दोहराया गया, जबकि अंग्रेज भारत में आए और गिनती के अंग्रेजों ने भी पूरे भारत पर कब्जा किया और मुगलों को सत्ता से हटाकर दो सौ वर्षों तक भारत के करोड़ो लोगों पर राज किया। वर्तमान राजनीति में भी यही सब फिर से दिखाई दे रहा है। लग रहा है कि इतिहास एक बार फिर अपने आप को दोहरा रहा है। नई बनी राजनीतिक पार्टी आम आदमी पार्टी ने एक दशक के भीतर दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस को साफ कर दो राज्यों में अपनी सरकार खड़ी कर ली है। अब यह पार्टी अन्य राज्यों में अपनी जमीन तलाशने में जुटी है, ताकि जनता की नाराजगी को भुनाकर लंबे समय से राज कर रही पार्टियों को साफ कर सके।

देश के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ में भारत की प्राचीन राजनीतिक व्यवस्था को विदेशी आक्रमणकारियों से जोड़ कर व्याख्या की है। पुस्तक में दिनकर ने कहा है कि मुहम्मद गौरी ने 1192 ईस्वी में दिल्ली को जीता था। काशी का पतन 1194 ईस्वी में हुआ और 1196-97 में बंगाल मुस्लिम आक्रांताओं के अधीन हो गया। पेशावर से बंगाल तक की विजय आठ-दस साल में पूरी हो गई, जबकि उस जमाने में न तो सड़कें थी और न ही यातायात के साधन, सैन्य उपकरण थे। दिनकर कहते हैं कि बंगाल के इतिहास के बारे में मुस्लिम लेखकों की चलाई गई यह कहानी प्रसिद्ध है कि सिर्फ 18 घुड़सवारों ने बंगाल के नदिया के राजमहलों पर कब्जा कर लिया था। इससे प्रत्यक्ष ज्ञात होता है कि इस देश के लोगों ने विदेशी आक्रमणकारियों सामना नहीं किया। जनता के मन में उस समय यही बात रही होगी कि ‘कोई नृप होय, हमहिं क्या हानी’। प्रसिद्ध लेखक और कवि प्रेमचंदजी ने अपनी कहानी ‘शतरंज के खिलाड़ी ‘ में नवाब वाजिदअली शाह की गिरफ्तारी का वर्णन किया है और बताया कि खून की एक बूंद बहाए बिना अंग्रेजों ने एक स्वाधीन देश के नवाब को गिरफ्तार कर लिया, मतलब उस समय भी जनता ने राजा का साथ नहीं दिया।

तीसरा विकल्प मिलते ही जनता ने पुरानी पार्टियों का नहीं दिया साथ
आजादी के 70 साल बाद एक बार फिर पूर्व का इतिहास दोहराता दिखाई दे रहा है, जबकि एक नई पार्टी आम आदमी पार्टी ने विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा और देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को साइड में कर पहले दिल्ली में अपनी सरकार बना ली और बाद में उसने पंजाब में भी हाल ही में बहुमत की सरकार बनाई है। इन दोनों जगहों पर कभी कांग्रेस जीत कर आती थी, तो कभी भाजपा या अकाली दल जीत कर आ जाता था। जनता इन पार्टियों से त्रस्त नजर आ रही थी और जैसे ही आप के रूप में उन्हें तीसरा विकल्प मिला, जनता ने पुरानी पार्टियों का साथ नहीं दिया और तीसरे विकल्प को जिता दिया।

राजस्थान में आप की सरकार बनाने का दावा
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने राजस्थान में एक बार कांग्रेस, एक बार भाजपा सरकार के ट्रेंड पर चोट की और कहा कि 2023 में आम आदमी पार्टी राजस्थान में सरकार बनाएगी। सिंह के इस दावे के पीछे भी कहा जा रहा है कि उनकी पार्टी प्रदेश के ट्रेंड पर चोट करेगी। जनता इस ट्रेंड से परेशान हो चुकी है। यहां शासन किसी का भी हो निरंकुश ही रहा है। जनता ही नहीं कांग्रेस-भाजपा के कार्यकर्ता व नेता भी अपनी पार्टियों से असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि यहां भी कुछ चुनिंदा नेता सत्तासुख भोगते आ रहे हैं, कार्यकर्ता की कहीं पूछ नहीं हो रही। कार्यकर्ताओं के बजाए दोनों पार्टियां अफसरशाही को ज्यादा तरजीह देती रही है, जिससे कार्यकर्ता चिढ़े हुए हैं। राजनीतिक संरक्षण पाकर अफसरशाही भी निरंकुश हो चुकी है और भ्रष्टाचार के जरिए सामूहिक लूट हो रही है, जिससे जनता ठगी हुई नजर आ रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ दिखावे की कार्रवाई हो रही है। एसीबी कार्रवाई करती है, लेकिन अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश करने की मंजूरी नहीं मिलती है। आप नेताओं के बयानों से साफ है कि आम आदमी पार्टी राजस्थान में भी पंजाब की तरह ही जनता से जुड़ाव शुरू करेगी। पंजाब में आप ने जनता को यही बोला था कि उन्होंने कई बार कांग्रेस और अकाली दल की सरकार को परखा है, एक बार आप को भी मौका दीजिए और दोनों दलों से परेशान पंजाब की जनता ने आप को अविश्वस्नीय समर्थन दे दिया। ऐसे में यही एजेंडा अब राजस्थान में चलने वाला है।

अभी से शुरू होगी दलबदल की अंधी दौड़
प्रदेश में आप के रूप में तीसरे विकल्प के आने से भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। रविवार से ही प्रदेश में कार्यकर्ताओं और असंतुष्ट नेताओं की दलबदल की दौड़ आप की तरफ होने लगेगी, जो अगले विधानसभा चुनावों तक जारी रहेगी। दोनों पार्टियों के कुछ बड़े खेमे भी आप के पास जा सकते हैं।

कांग्रेस को अल्पसंख्यक वोटों का भी नुकसान
राजस्थान के अल्पसंख्यक नेता बड़ी तादात में आप की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, क्योंकि कांग्रेस में कुछ गिने-चुने अल्पसंख्यक नेता दूसरे अल्पसंख्यक नेता को आगे नहीं आने देते। ऐसे में बिहार चुनावों के बाद राजस्थान के अल्पसंख्यक नेताओं ने एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी से संपर्क साधा था, लेकिन बंगाल और उत्तर प्रदेश चुनावों में एआईएमआईएम को सफलता नहीं मिलने के कारण यह नेता अब आप की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह और नए चुनाव प्रभारी विनय मिश्रा ने शनिवार को जयपुर में प्रेसवार्ता कर बताया कि वह रविवार को जयपुर में पार्टी का सम्मेलन कर रहे हैं। दोनों नेता स्थानीय आप के नेताओं से मिलकर आगे आगे की कार्ययोजना सौंपेंगे। ग्रासरूट पर पार्टी कार्यकर्ताओं को जनता की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाकर ध्यान खींचने पर जोर दिया जाएगा। आप के जयपुर सम्मेलन से राजस्थान में चुनावी तैयारियों का आगाज माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि रविवार को ही अन्य पार्टियों के कुछ नेता व कार्यकर्ता आप ज्वाइन करेंगे।

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