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चोटी का राज, नहीं बता रहे महाराज

राहु शांति और वाणी शुद्धि के लिए रखी जाती है शिखा
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास की चोटी इन दिनों पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी चोटी को लेकर विवाद भी चल रहे हैं। खुद प्रताप सिंह ने कैमरों के सामने बोला कि भाजपा वाले उनकी चोटी काटने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में भाजपा को जवाब भी दिया, जो काफी वायरल हुआ और चर्चा का विषय बना। आखिर क्या कारण है कि खाचरियावास को 55वें वसंत में शिखा धारण करने की सोच आई। हालांकि अभी तक उनकी ओर से कोई पुख्ता कारण नहीं बताया गया है लेकिन ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि अगर कोई जातक शिखा धारण करता है, तो उसका यही अर्थ होता है कि या तो उस जातक का राहु नीच का है और खराब फल देते हुए वाणी में अशुद्धता पैदा कर रहा है।
जयपुर के ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर शर्मा का कहना है कि पौराणिक इतिहास देखा जाए, तो सभी समाज के लोग शिखा रखते थे। शिखा आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक होती है। राहु शांति के लिए ज्योतिष में शिखा रखने का उपाय बताया जाता है। राहु जातक के कॉन्फिडेंस को प्रभावित करता है। आत्मविश्वास को घटाना—बढ़ाना राहु के प्रभाव क्षेत्र में आता है। राहु खराब होने पर जातक की सोच—समझ और वाणी प्रभावित होती है। ऐसे में शिखा धारण करने पर राहु का प्रभाव कम होता है और आत्मशुद्धि के बाद वाणी शुद्धि होती है।
ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रमोहन दाधीच का कहना है कि समाज का कोई भी वर्ग हो शिखा धारण कर सकता है। शिखा धारण करने से जातक बृह्मांड सकारात्मक उर्जा के संपर्क में आता है और उसके अंदर की नकारात्मकता खत्म होकर आध्यात्मिक उर्जा बढ़ती है। ऐसे में जातक की बुद्धि के विकार खत्म होते हैं और वाणी में भी शुद्धता आती है। मनोविकारों से भी मुक्ति मिलती है।
जानकारी के अनुसार लाल किताब के जानकार भी राहु के अशुभ प्रभावों को दूर करने और वाणी ​की शुद्धता के लिए शिखा और तिलक धारण करने का उपाय बताते हैं, या फिर घर से बाहर निकलने पर सिर को टोपी या किसी अन्य वस्त्र से ढंक कर रखने की सलाह देते हैं।
इन जातकों को कराए जाते हैं यह उपाय
.जो जातक बहुत ज्यादा बोलते हैं और बोलते समय उन्हें यह ध्यान नहीं रहता है कि वह क्या बोल रहे हैं।
.वह जातक काम पहले करते हैं और काम से उनका अच्छा होगा या बुरा बाद में सोचते हैं और हमेशा नुकसान उठाते हैं।
.वह जातक जिनके वाणी दोष हो और वह जब तक चुप रहते हैं, तब तक लोग चेहरे—मोहरे को देखकर अनुमान लगाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति बहुत प्रभावशाली होगा, लेकिन जैसे ही ऐसे जातक बोलते हैं, तो सामने वालों के सामने उनका कच्चा चिट्ठा खुल जाता है और सामने वाला समझ लेता है कि जातक में कोई दम नहीं है।

अधिकांश बयानों पर होता है विवाद
प्रताप सिंह खाचरियावास के बारे में भी प्रसिद्ध है कि वह काफी जोशीले वक्ता हैं और बोलते समय कई बार वह जोश—जोश में कुछ ऐसी बातें बोल देते हैं, जिन्हें नहीं बोलना चाहिए। देखा जाता है कि उनके अधिकांश बयान विवादों में आ जाते हैं और बाद में उन्हें बात को संभालना पड़ता है। ऐसे में कहा जा रहा है​ कि खाचरियावास का पाला इस बार दशकों से राजनीतिक पत्रकारिता करने वाले, कम और असल बात बोलने वाले अखबार मालिक से पड़ा है, जिनकी पूरी जिंदगी मानसिक कार्य करते हुए निकली है। ऐसे में राहु और वाणी में सुधार तो बनता है।

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