बालिकाओं में आत्मविश्वास बढाने में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं महिला सखियां:गहलोत

जयपुर

मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा सखियों के साथ संवाद

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि महिला सुरक्षा सखियां महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका अदा कर रही हैं। आने वाले समय में महिला सुरक्षा सखी कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए और महिलाओं व बालिकाओं को इससे जोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रदेश में बालिकाओं को दिए जा रहे आत्मरक्षा कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी विस्तार करने की बात कही है।

गहलोत शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न थानों से जुडी महिला सुरक्षा सखियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने सुरक्षा सखियों को 10 में से 10 नम्बर देते हुए कहा कि आप सभी अपनी भूमिका बेहतर तरीके से निभा रही हैं। आपने बालिकाओं में सुरक्षा की भावना और उनमें आत्मविश्वास मजबूत करने का काम किया है। इसके लिए आप सभी बधाई की पात्र हैं।

उच्चैन, भरतपुर की महिला सखी मंजू ने जब मुख्यमंत्री को बताया कि वे 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे नहीं पढ़ पाई तो मुख्यमंत्री ने उन्हें आगे पढ़ने की प्रेरणा देते हुए पुलिस अधिकारियों को उनकी आगे की पढ़ाई सुनिश्चित करने में सहयोग करने के निर्देश दिए। सोड़ाला थाना क्षेत्र की महिला सखी टीना ने मुख्यमंत्री को बताया कि मनचलों की छेडछाड से परेशान लडकियों को पुलिस की मदद दिलाने में उन्होंने सहयोग किया तो मुख्यमंत्री ने उनकी हौंसला अफजाई की।

बांसवाड़ा की अंजली खरबंदा ने बताया कि किस तरह उन्होंने गैंगरेप पीडिता की मदद कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने जब उनसे पूछा कि आपको डर नहीं लगता तो अंजली का जवाब था कि महिला सुरक्षा सखी बनने के बाद वे डर के फेज से आगे निकल चुकी हैं। अब किसी भी मामले को लेकर पुलिस के पास अप्रोच करने में किसी तरह की झिझक नहीं होती। सुरक्षा सखियों का कहना था कि इस कार्यक्रम से महिलाओं में सुरक्षा का भाव बढ़ा है। खातौली, कोटा की आशा नामा, भिवाडी की नीलम ठाकुर, पाली की हिमांशी ने संवाद के दौरान बताया कि कैसे उन्होंने स्कूल जाने वाली बालिकाओं से छेडछाड रोकने, बाल विवाह रूकवाने और पति के अत्याचार से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने में पुलिस के सहयोग से कामयाबी हासिल की।

गहलोत से संवाद के दौरान अधिकतर महिला सखियों का सुझाव था कि महिला सखियों की बैठकें वार्ड अथवा मोहल्ले में हों तो महिलाएं अपनी पीड़ा बताने के लिए आगे आएंगी और पुलिस की मदद ले पाएंगी। इससे मनचलों एवं छेडछाड करने वालों में भी भय पैदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा सखियों की सक्रियता से छेडछाड करने वाले मनचलों एवं महिलाओं पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने में पुलिस को काफी मदद मिली है। उन्होंने आगे भी इस तरह का संवाद महिला सुरक्षा सखियों के साथ कायम रखने और उनकी हौसला अफजाई करने की बात कही। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली में बदलाव को आज की जरूरत बताया और कहा कि पुलिस अधिकारी एवं पुलिसकर्मी ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए महिलाओं के खिलाफ उत्पीडन व अपराध की घटनाओं पर संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही करें। थानों में अनिवार्य एफआईआर दर्ज करने के नवाचार के बाद काफी हद तक थानों का माहौल बदला हैै। अनिवार्य एफआईआर लागू होने के बाद कोर्ट से इस्तगासे के माध्यम से दर्ज होने वाले मामले 33 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत पर आ गए हैं।

गहलोत ने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों के विरूद्ध होने वाले गंभीर अपराधों के प्रभावी अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण के लिए प्रदेश के सभी जिलों में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट विमन का गठन किया गया है। इसमें एएसपी स्तर के अधिकारी को लगाया गया है। थाने में आने वाले हर फरियादी के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने थानों में स्वागत कक्ष बनाए हैं। उन्होंने एफएसएल लैब्स में फॉरेंसिक जांच का समय 15 दिन से घटकर 3 से 5 दिन होने के कारण अपराधों के अनुसंधान की गति बढ़ी है।

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