भाजपा राज में दो बार हुआ रीट पेपर आउट, तो क्या वर्ष 2014 से 2018 तक के आउट पेपरों की सीबीआई से जांच क्यों नहीं करा ली जाए?

जयपुर

पेपर लीक होने की घटनाओं को रोकने के लिए इसी सत्र में लाया जायेगा विधेयक, विधेयक में है कड़े प्रावधान

जयपुर। रीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर दूसरे दिन भी विधानसभा में घमासान चलता रहा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने गुरुवार को विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए हंगामा कर रहे भाजपा विधायकों पर निशाना साधा और कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में रीट का पेपर दो बार वर्ष 2016 तथा वर्ष 2018 में आउट हुआ था। गत सरकार द्वारा सीबीआई तो दूर एसओजी तक से भी जांच नहीं कराई गई थी। गत सरकार के कार्यकाल में 5 बार पेपर लीक हुए थे, वर्ष 2014 में आरएएस, आरजेएस, वर्ष 2013 में एलडीसी तथा वर्ष 2018 जेल प्रहरी के भी पेपर लीक हुए थे। तत्कालीन सरकार द्वारा एक भी प्रकरण की सीबीआई तो दूर एसओजी को भी जांच नहीं सौंपी गई थी।

उन्होंने कहा कि गत सरकार द्वारा विभिन्न पेपर लीक प्रकरणों में क्रमशः 10, 11, 12 तथा 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था जबकि रीट के मामले में वर्ममान सरकार द्वारा अब तक 38 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गत सरकार द्वारा विभिन्न पेपर लीक प्रकरणों में उचित जांच नहीं की गई, इस कारण नकल गिरोह की हिम्मत बढ़ी है, लेकिन अब सरकार द्वारा इस संबंध में विधेयक लाया जाएगा, विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए है जिससे अब पेपर लीक मामलों पर रोक लग सकेगी। तो क्या वर्ष 2014 से 2018 तक के आउट पेपरों की सीबीआई से जांच क्यों नहीं करा ली जाए?

धारीवाल ने गृहमंत्री की ओर से विधानसभा को आश्वस्त करते हुए कहा कि पेपर लीक होने के मामले को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा विधेयक तैयार कर लिया गया है। विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए है जिससे इस तरह की अनियमितताएं नहीं हो इसके लिए सरकार द्वारा इसी सत्र में इस विधेयक को प्रस्तुत किया जाएगा।

इससे पहले विधायक बलजीत यादव के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में धारीवाल ने बताया कि प्रदेश में विगत तीन वर्षों में पेपर आउट अथवा लीक के कुल 8 प्रकरण दर्ज हुए हैं जिनका थानेवार विवरण उन्होंने सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि गत तीन वर्ष में दर्ज कुल 8 प्रकरणों में 85 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई है। चार प्रकरणों में चालान पेश किया जा चुका है। एक प्रकरण मे चालान न्यायालय में पेश किया जाना शेष है। तीन प्रकरणों में अनुसंधान जारी है। उन्होंने इसका विवरण सदन के पटल पर रखा।

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