बड़ी चौपड़ पर सोमवार को सुबह 10:30 बजे एकजुट हुए भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बाद में सीएम गहलोत का पुतला फूंका। इसके बाद यहां से प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम हैरिटेज मुख्यालय की ओर कूच किया। जहां हवामहल के पीछे वाले गेट पर कार्यकर्ताओं को पुलिस के जवानों ने मुख्य गेट बंद करके रोक दिया। यहां कार्यकर्ताओं और जवानों की मामूली झड़प भी हुई।
शहर भाजपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी करीब 6 दिन पहले ही नगर निगम हैरिटेज में जनसमस्याओं के मुद्दे पर ज्ञापन देने पहुंचे थे, लेकिन तब वहां न तो कमिश्नर उनसे मिले और न ही मेयर उनसे मिली। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने 6 दिन में समस्याओं का निस्तारण नहीं करने पर बड़ा आंदोलन और प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसी चेतावनी के बाद सोमवार को यह प्रदर्शन किया गया।
हवामहल के पीछे वाला गेट बंद करने के बाद कुछ कार्यकर्ता जलेब चौक वाले रास्ते से हैरिटेज नगर निगम परिसर में एंट्री कर गए। यहां से कार्यकर्ताओं ने जब हैरिटेज कार्यालय में जाने की कोशिश की तो उन्हें वहां तैनात पुलिस और होम गार्ड के जवानों ने रोक लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नगर निगम हैरिटेज की मेयर मुनेश गुर्जर और कमिश्नर विश्राम मीणा के खिलाफ नारेबाजी की।
पर्यटकों में रहा भय का माहौल
हवाहमल सुबह 9 बजे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है और बड़ी संख्या में सुबह से ही पर्यटक इसे देखने के लिए आते हैं, लेकिन बड़ी चौपड़ पर भारी भीड़ और नारेबाजी से पर्यटकों में भय का माहौल व्याप्त हो गया। सुबह आने वाले पर्यटक हवामहल नहीं देख पाए। भीड़ के कारण पर्यटकों को लाने वाले ऑटो, ई-रिक्शा वाले भी मौके से रवाना हो गए। शहर के पूरे पर्यटन स्थलों पर अफवाह फैल गई कि हवामहल पर प्रदर्शन हो रहा है, जिसके चलते पर्यटकों ने दिन में हवामहल जाने से परहेज किया। प्रदर्शन के दौरान नाम मात्र के ही पर्यटक गोवर्धनजी मंदिर के रास्ते हवामहल में डरते-डरते पहुंच पाए। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद पर्यटक हवामहल पहुंचे, लेकिन इनकी संख्या कम रही।
निगम हेरिटेज मुख्यालय शहर पर्यटन के लिए नुकसानदेह
शहर में दो नगर निगम बनाने के बाद सरकार ने नगर निगम हेरिटेज का मुख्यालय परकोटा शहर में स्मारकों के बीच बना दिया, जो शहर के पर्यटन के लिए काफी नुकसानदेह है, इसकी बानगी सोमवार को दिखाई दे गई। जिस इमारत में नगर निगम का मुख्यालय बनाया गया है, उस जगह को जंतर-मंतर के विश्व विरासत स्थल बनने के बाद पर्यटकों की सुविधाओं, पार्किंग आदि के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन सरकार ने मनमानी कर पर्यटकों की सुविधा का ध्यान नहीं रखा। नगर निगम मुख्यालयों पर आए दिन धरने-प्रदर्शन होते रहते हैं। अब अगले वर्ष विधानसभा चुनाव, उसके छह महीने बाद लोकसभा चुनाव और उसके बाद नगर निगम के चुनावों के चलते निगम पर धरने-प्रदर्शनों की भरमार रहेगी और इसका खामियाजा शहर के पर्यटन को ही भुगतना होगा।