9 अगस्त को सांसद डॉ.किरोड़ी के जलक्रांति आंदोलन का आगाज, 75 हजार लोग तिरंगे के साथ करेंगे जयपुर कूच

जयपुर

जयपुर। 2023 के विधानसभा चुनावों में पूर्वी राजस्थान में अपनी बढ़त को बरकरार रखने के लिए कांग्रेस ईस्टर्न कैनाल योजना परियोजना (ईआरसीपी) के मामले को जोर-शोर से उठा रही है, वहीं भाजपा भी पूर्वी राजस्थान में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के लिए कमर कसकर तैयार हो रही है। ईआरसीपी मामले को लेकर अब भाजपा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को दौसा जिला मुख्यालय के पास मीणा हाईकोर्ट नांगल प्यारीवास में जल क्रांति आंदोलन का ऐलान किया है। यहां आयोजित होने वाली जनसभा में राज्य सरकार से ईआरसीपी प्रोजेक्ट की संशोधित डीपीआर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की जाएगी।

किरोड़ी लाल मीणा ने 9 अगस्त को प्रस्तावित जल क्रांति के लिए 75 हजार लोगों के साथ 75 हजार झंडे, 75 विधानसभा के लोगों व 75 किलोमीटर का विधानसभा के लिए पैदल कूच करने का ऐलान किया है। जिसमें प्रदेश के 13 जिलों सहित प्रदेश के कई जिलों के लोग शामिल होंगे।

सभा में आगंतुकों के लिए बैठने टेंट, 350 चांदनी, स्टेज बनाया जाएगा। नांगल प्यारीवास मे एक लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था का टेंट लगाया जा रहा है, ताकि आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। यहां 75 वें अमृत महोत्सव के तहत टीटोली टोल प्लाजा से लेकर हाईकोर्ट परिसर तक तिरंगे झंडों से सजाया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम सभी पार्टियों के सांसद, विधायक, प्रधान, जिला प्रमुख सहित अन्य जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समर्थकों ने 8 और 9 अगस्त को होने वाली जनसभा में भीड़ जुटाने को लेकर गांव-ढाणियों तक दौरे शुरू कर दिए हैं। साथ ही कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए जिला और ब्लाक स्तर पर टीमें बनाई गई हैं।

मीणा ने ईआरसीपी को लेकर 10 जुलाई को भी नांगल में सभा कराने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के व्यस्त कार्यक्रम के चलते सभा नहीं हो पाई थी। उल्लेखनीय है कि किरोड़ी लाल मीणा पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर काफ ी मुखर रहे हैं। मीणा कहना है कि राज्य सरकार को संशोधित डीपीआर केंद्र को भेजना चाहिए। केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलवाने की जिम्मेदारी उनकी है।

मीणा का आरोप है कि राज्य सरकार तकनीकी खामी दूर नहीं कर रही है। ईआरसीपी को लेकर डीपीआर केंद्र को भेजी गई थी। उसमें 50 प्रतिशत जल निर्भरता का प्रोजेक्ट बनाया था। राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने के लिए 75 प्रतिशत जल निर्भरता आवश्यकता है। साथ ही चंबल का पानी मध्य प्रदेश से आता है। ऐसे में मध्य प्रदेश की सहमति भी आवश्यक है। वहीं दौसा सहित करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और जयपुर के सभी बड़े बांधों को इस परियोजना में शामिल किया जाए। राज्य सरकार यदि यह तीनों तकनीकी खामी दूर करके पुन: प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दे तो इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाना उनकी गारंटी है।

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