राजनीति

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अमित शाह के खिलाफ कांग्रेस के विशेषाधिकार नोटिस को खारिज किया

नयी दिल्ली। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दायर विशेषाधिकार हनन नोटिस को खारिज कर दिया। उन्होंने इसे शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करार दिया। यह नोटिस शाह पर आपदा प्रबंधन विधेयक, 2024 पर बहस के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाता था।
क्या था विशेषाधिकार हनन का आरोप?
जयराम रमेश ने सभापति को भेजे नोटिस में कहा कि 25 मार्च 2025 को जब अमित शाह ने आपदा प्रबंधन विधेयक, 2024 पर बहस के दौरान जवाब दिया, तो उन्होंने यह संकेत दिया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) कांग्रेस शासन के दौरान एक परिवार के नियंत्रण में था।
राज्यसभा में इस विषय पर धनखड़ ने कहा, “26 मार्च 2025 को मुझे जयराम रमेश का एक विशेषाधिकार हनन नोटिस प्राप्त हुआ। उन्होंने इसमें उल्लेख किया कि 25 मार्च को अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था कि – ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष कांग्रेस शासन के दौरान बनाया गया था और पीएम केयर्स फंड नरेंद्र मोदी जी के शासनकाल में एनडीए सरकार के दौरान बनाया गया। कांग्रेस शासन में यह केवल एक परिवार के नियंत्रण में था। कांग्रेस अध्यक्ष इसके सदस्य थे। देश की जनता के समक्ष कांग्रेस अध्यक्ष क्या जवाब देंगे सरकारी धन को लेकर? उन्हें लगता है कि कोई इसे पढ़ता या देखता नहीं है।’”
अमित शाह के बयान की पुष्टि हुई
धनखड़ ने बताया कि अमित शाह ने 24 जनवरी 1948 को केंद्र सरकार द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति प्रस्तुत की, जो उनके बयान की पुष्टि करती है।
उन्होंने कहा, “मुझे इसमें कोई विशेषाधिकार हनन नहीं दिखता। जो कहा गया, वह सत्य पर आधारित है, जिसे एक दस्तावेज़ द्वारा प्रमाणित किया गया है। इस स्थिति में, मैं इस विशेषाधिकार हनन नोटिस को स्वीकार करने के लिए खुद को प्रेरित नहीं कर सकता।”
धनखड़ ने विशेषाधिकार नोटिस के दुरुपयोग पर जताई चिंता
राज्यसभा के सभापति ने विशेषाधिकार हनन प्रस्तावों की गंभीरता पर जोर देते हुए इनके दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं गहरी वेदना और चिंता के साथ इस नोटिस को अस्वीकार कर रहा हूँ। हमें जल्दबाजी में विशेषाधिकार हनन का सहारा नहीं लेना चाहिए… यह सदन किसी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का मंच नहीं बनेगा।”
धनखड़ ने एसबी चौहान समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सांसदों को संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने की नसीहत दी। उन्होंने घनश्याम तिवारी की अध्यक्षता वाली नैतिकता समिति (Ethics Committee) को निर्देश दिया कि वह इस रिपोर्ट की समीक्षा कर संसदीय आचरण से संबंधित नए दिशानिर्देश तैयार करे।
कांग्रेस का पलटवार
इस फैसले के बावजूद जयराम रमेश अपने रुख पर अडिग रहे। उन्होंने कहा, “यह स्थापित तथ्य है कि किसी भी सदन के सदस्य पर आक्षेप लगाना या अपमानजनक टिप्पणी करना विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने “पूर्व नियोजित तरीके से झूठे आरोप लगाकर सोनिया गांधी की छवि खराब करने की कोशिश की।” इसलिए, उन्होंने अमित शाह के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही की मांग दोहराई।
हालांकि, धनखड़ के निर्णय से यह मामला अब प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। अब नैतिकता समिति को संसद में आचरण संबंधी व्यापक मुद्दों की समीक्षा करने का जिम्मा सौंपा गया है।

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