गहलोत की चालों में दोबारा गच्चा खा गए पायलट

जयपुर

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर ऐसे ही नहीं कहा जाता है। उनकी चालों के आगे अच्छों—अच्छों की राजनीति फेल हो जाती है। ऐसा ही कुछ राज्यसभा चुनावों में देखने को मिल रहा है, जहां बाहरी उम्मीदवारों को आगे कर गहलोत ने आलाकमान के पास अपने नंबर बढ़ा लिए, लेकिन उनके विरोधी सचिन पायलट इन चालों में ऐसे उलझे कि दोबारा गच्चा खा गए।

बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायकों ने शुरूआत में बाड़ाबंदी में जाने से आनाकानी की थी। इस दौरान वह अलवर में घूमते रहे। मुख्यमंत्री गहलोत इन विधायकों को किसी तरह मनाकर इन विधायकों को बाड़ाबंदी में उदयपुर लेकर गए। कांग्रेस में कहा जा रहा है कि यहां सचिन पायलट अपने नंबर बढ़वाने से गच्चा खा गए। यह विधायक बाड़ाबंदी में नहीं आ रहे थे, तो पायलट को इन विधायकों से बाड़ाबंदी में आने और कांग्रेस का साथ देने की अपील करनी चाहिए थी। अगर वह अपील कर देते तो यह हो जाता कि पायलट के कहने पर यह विधायक बाड़ाबंदी में पहुंचे और पायलट के नंबर बढ़ जाते, लेकिन पायलट के पास राजनीतिक सलाहकारों की कमी दिखाई दी और किसी ने उन्हें इस अपील का सुझाव नहीं दिया। ऐसे में पायलट को अपने राजनीतिक सलाहकारों के बारे में सोचना पड़ेगा।

उधर मुख्यमंत्री गहलोत ने अपनी चालों से आलाकमान के पास अपने नबर बढ़वा लिए। कांग्रेस में कहा जा रहा है कि यदि राजस्थान के किसी राजनेता को राज्यसभा के लिए उतारा जाता तो, कांग्रेस की अंतरकलह के चलते उसकी जीत के लाले पड़ जाते। ऐसे में गहलोत ने राज्य से बाहरी उम्मीदवारों को उतारने को तरजीह दी। ऐसे में एक ओर तो कांग्रेस में टूट की संभावनाएं खत्म हो गई और दूसरी ओर आलाकमान के नजदीकी लोगों को उम्मीदवार बनवाने से उनके नंबर भी बढ़ गए।

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