बाड़ी बसेड़ी की यारी, कांग्रेस पर पड़ेगी भारी

जयपुर

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा बजाय एक एससी वर्ग के सरकारी कर्मचारी के साथ खड़ा होने के बाड़ी विधायक मलिंगा के साथ खड़े दिखाई दे रहे

जयपुर। भाजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा के भरतपुर संभाग दौरे के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि भाजपा चुनावी मोड में आ गई है। ऐसे में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी सतर्क हो जाना चाहिए था, क्योंकि भाजपा की नजर भरतपुर संभाग पर है, लेकिन भरतपुर संभाग के कांग्रेसियों के बीच तो कुछ अलग ही खिचड़ी चल रही है। यदि यह खिचड़ी पकी तो संभाग में कांग्रेस को हमेशा जीत दिलाने वाला एससी वोटर कांग्रेस से छिटक सकता है।

ऐसा बाड़ी में बिजली विभाग के एईएन हर्षदापति वाल्मिकी के मामले को लेकर कहा जा रहा है। कांग्रेस में कहा जा रहा है कि एईएन एससी वर्ग से आते हैं और इस मामले में अनुसूचित जाति आयोग द्वारा इनकी मदद की जानी चाहिए थी, लेकिन आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा इस मामले में नामजद बाड़ी विधायक गिर्राज सिंह मलिंग के साथ राजनीतिक यारी निभाने में जुटे हैं।

शादी समारोह में एक साथ दिखाई दिए गिर्राज सिंह मलिंगा और खिलाड़ी लाल बैरवा

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सरेंडर से पूर्व गिर्राज सिंह मलिंगा और खिलाड़ी लाल बैरवा मुरैना में बसेड़ी प्रधान अमित परमार की शादी समारोह में एक साथ दिखाई दिए। वहीं मलिंगा को जमानत मिलने और कोरोना नेगेटिव आने के बाद बाड़ी में मलिंगा की ओर से हुए शक्ति प्रदर्शन में भी खिलाड़ी लाल बैरवा प्रमुख नेता के रूप में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और विधायक वाजिद अली के साथ शक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए।

ऐसे में कांग्रेस में सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर किस कारण अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा उन विधायक के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जो अनुसूचित जाति के एईएन के साथ मारपीट मामले में नामजद हैं। हर्षदापति वाल्मिकी जाति से है जो एससी वर्ग में आती है और वो कांग्रेस नेता व चाकसू से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके केप्टन मुकेश वाल्मीकि के पुत्र हैं।

कांग्रेस में चर्चा है कि एक ओर तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं अस्पताल जाकर घायल बिजली कर्मचारियों का हाल जानने जाते हैं, वहीं उन्हीं की सरकार में अनुसूचित आयोग के अध्यक्ष नामजद के साथ खड़े नजर आते हैं। क्या यह संयोग है या भरतपुर संभाग कांग्रेस में कोई नया प्रयोग चल रहा है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अनुसूचित जाति आयोग अध्यक्ष एससी अत्याचार में कार्रवाई करने के बजाए नामजद के साथ खड़े हैं। इस मामले को लेकर क्या खिलाड़ी बैरवा को मलिंगा से दूरी नहीं बनानी चाहिए थी? आखिर एससी आयोग कर क्या रहा है कि उसने इस मामले में संज्ञान तक नहीं लिया? इस मामले में एससी आयोग ने परिवाद दर्ज क्यों नहीं किया? इस मामले को लेकर कांग्रेस के एससी वर्ग के नेताओं में भारी नाराजगी दिखाई दे रही है और वह कह रहे हैं कि आयोग अध्यक्ष इस तरह का आचरण करेंगे तो अगले चुनाव में एससी वर्ग कैसे कांग्रेस का साथ देगा?

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