रीट पेपर लीक मामले में सियासत तेज, शिक्षा बोर्ड मुख्यालय पहुंची एसओजी, दस्तावेज किए जप्त,

जयपुर

जयपुर। रीट पेपर लीक मामले में सियासी रंग अब चढऩे लगा है और जमकर सियासत हो रही है। भाजपा जहां इस मामले में आक्रामक दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस इस मामल में बचाव की मुद्रा में आ चुकी है। गुरुवार को इस मामले में सियासत तब तेज हुई, जबकि एसओजी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के मुख्यालय पहुंच गई और उसने बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली से पूछताछ की। एसओजी ने मुख्यालय से जांच से संबंधित दस्तावेज और डाटा जप्त किया है।

रीट का पेपर जयपुर शिक्षा संकुल के स्ट्रांग रूम से लीक होने की बात सामने आ चुकी है। एसओजीने भजनलाल, राम कृपाल मीणा, उदाराम को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता लगा था कि उदाराम को राम कृपाल मीणा ने जयपुर में पेपर दिया था।

एसओजी की पूछताछ के बाद राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने कहा कि एसओजी जांच कर रही है। जांच के बाद असलियत सामने आ जाएगी और जो आरोपी पकड़े गए और जो पूछताछ में सामने आया, उससे संबंधित दस्तावेज की जानकारी के लिए टीम आई थी। टीम को दस्तावेज दिखा दिए और डाटा भी दिया है।

एसओजी के बोर्ड मुख्यालय पहुंचने और डाटा जप्त करने के बाद से ही भाजपा इस मामले में आक्रामक रुख में आ गई है और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की ओर से परीक्षा को रद्द करने और सीबीआई से इस मामले की जांच कराए जाने की मांग तेज हो गई है।

रकम के बंटवारे के प्रमाण भी जल्द उपलब्ध कराएंगे
उधर इस मामले में शुरू से ही मुखर रह भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री और बड़े अधिकारी ने पेपर आउट कराया और उसके बाद जो पैसा इक_ा हुआ उसका बंटवारा भी किया। इसका प्रमाण भी वे जल्द ही मीडिया के सामने रखेंगे। मीणा ने प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि जो पेपर आउट हुए, वह हर जिले में पहुंचाए गए। उन्होंने रीट को रद्द कर परीक्षा दुबारा करवाने की मांग की है।

किरोड़ी लाल मीणा ने आरोप लगाया कि इस मामले में एसओजी के जांच अधिकारी सीआई मोहन पोसवाल और कांस्टेबल नाथू निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं, जबकि जो लोग पेपर आउट में लिप्त हैं, उन्हें छोडï दिया गया। कमल यादव नाम के एक शख्स ने अपनी साली पूनम को पेपर दिया था। एसओजी ने पूनम को पकड़ा, लेकिन आशीष और सुमित नाम के लोगों को बचाया।

भजनलाल की बहन द्रौपदी ने भी इन्हें रिश्वत दी, लेकिन जब चारों तरफ से दबाव बढ़ा तो उसे गिरफ्तार किया गया। खंडार के विजय को पेपर मिला, उसकी पत्नी ने जोधपुर के एक केंद्र पर परीक्षा दी। उसके पास से पेपर 20 लोगों तक पहुंचा। इन सभी को बड़ी राशि लेकर छोडऩे का किरोड़ीलाल ने आरोप लगाया।

जारोली की भूमिका संदेह के घेरे में
भाजपा विधायक दल के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि रीट पेपर लीक मामले शिक्षा संकुल स्ट्रॉन्ग रूम से मुख्य अभियुक्त रामकृपाल मीणा ने उदाराम विश्नोई को 1 करोड़ 22 लाख रुपए में रीट का पेपर दिया। इससे स्पष्ट हो चुका है कि रीट भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर धांधली हुई है, इसलिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को तत्काल प्रभाव से रीट प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।

राठौड़ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह रीट पेपर लीक प्रकरण में एसओजी के अनुसंधान के बाद 35 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। उनमें बड़े प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे एवं कई मुख्य अभियुक्तों के कांग्रेस नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध भी सामने आए हैं। गहलोत सरकार में ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों की मिलीभगत और उनके संरक्षण के बिना इस तरह पेपर लीक नहीं हो सकता।

राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार के राज में लाइब्रेरियन, एसआई व जेईएन भर्ती परीक्षाओं के भी पेपर लीक हुए, लेकिन सरकार नकल माफिया गिरोह पर लगाम नहीं लगा सकी है। सरकार ने 17 अक्टूबर 2021 को नया नकल अध्यादेश लाने की घोषणा की थी, लेकिन यह भी धरातल पर नहीं आ सका। अगर सरकार यह अध्यादेश पूर्व में लाती तो सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की संलिप्तता मिलने पर उन्हें बर्खास्त किया जाता।

राठौड़ ने कहा कि रीट पेपर लीक प्रकरण में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इन्होंने अपने खास गैर सरकारी व्यक्ति प्रदीप पाराशर को जयपुर का को ऑर्डिनेटर बना दिया, जबकि शेष सभी जिलों में सरकारी व्यक्ति को को आर्डिनेटर बनाया गया था। स्पष्ट है, रीट परीक्षा पेपर को सुनियोजित साजिश के तहत लीक कराया गया और बड़ी संख्या में युवाओं को 8-12 लाख लेकर पेपर बेचा गया।

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