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डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में भ्रष्टाचार पर एसीबी में शिकायत

जयपुर स्वास्थ्य

निगम अधिकारियों और फर्म पर लगाए मिलीभगत के आरोप

जयपुर। राजधानी में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था लागू कर नगर निगम ने शहर के लोगों को जो सपने दिखाए थे, वह तो पूरे नहीं हुए, बल्कि अब नगर निगम अधिकारियों और कचरा संग्रहण फर्म के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर एसीबी में शिकायत जरूर हो गई है।

शिकायतकर्ता पूर्व पार्षद अनिल शर्मा का कहना है कि डोर-टू-डोर के नाम पर पिछले चार सालों में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। सबसे पहली बात तो यह कि कचरा संग्रहण फर्म बीवीजी कंपनी को नियमों को दरकिनार कर कार्यआदेश सौंपा गया था। उसके बाद से आज तक इस फर्म ने अनुबंध की शर्तों के अनुसार एक भी काम नहीं किया। अनुबंध की सबसे प्रमुख शर्त डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण थी, जो आज तक पूरी नहीं हो पाई, इसके बावजूद कंपनी को अधिकरियों की मेहरबानी से हर महीने गलत तरीके से भुगतान होता रहा।

शर्मा ने बताया कि अनुबंध की शर्तो के अनुसार कचरा संग्रहण के पैकेज निर्धारण में निगम अधिकारियों द्वारा कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। निगम के संसाधन फर्म को उपलब्ध कराकर अनुचित फायदा पहुंचाया गया। संवेदक द्वारा आज तक पूरे संसाधन नहीं लगाए गए हैं। डोर-टू-डोर करने के बजाए संवेदक कचरा डिपो से कचरा 1650 रुपए प्रतिटन के हिसाब से उठा रहा है, जबकि यही काम पूर्व में निगम के ठेकेदार 500 रुपए प्रतिटन के हिसाब से उठाते थे। ऐसे में निगम को 1100 रुपए प्रतिटन का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कचरे के साथ मिट्टी मलबा तुलवाकर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

शर्मा के अनुसार फर्म ने डोर-टू-डोर करने के बजाए कचरा डिपो से कचरा उठाने का कार्य सबलेट कर रखा है, जिसके दस्तावेज एसीबी को उपलब्ध कराए गए हैं। छोटे ठेकेदार सॉलिड वेस्ट नियमों का उल्लंघन कर खुले वाहनों और ट्रेक्टरों में कचरा परिवहन कर रहे हैं। फर्म के संसाधनों पर शर्तों के अनुसार आज तक व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम नहीं लगा है।

फर्म की ओर से लगे सफाई कर्मचारियों की ईएसआई, पीएफ की कटौती नहीं कर बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है। न कर्मचारियों को इंश्योरेंस कवर दिया जा रहा है और न ही उनके खातों में वेतन का भुगतान किया जा रहा है। पहचान पत्र और वर्दी की बात तो दूर है।

शर्मा ने बताया कि फर्म के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। फर्म के कार्यों की निगरानी के लिए लगाए गए स्वतंत्र इंजीनियरों ने भी रिपोर्ट दी है कि फर्म शर्तों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है। निगम बोर्ड की बैठक में भी कंपनी के खिलाफ कई बार मामले उठ चुके हैं।

कंपनी की ओर से शर्तों के अनुरूप परकोटे की गंदी गलियों की सफाई का कार्य लगातार नहीं किया जा रहा है। ऐसे में एसीबी से मांग की गई है कि वह इस मामले में एफआईआर दर्ज कर फर्म व निगम अधिकारियों के बीच चल रहे भ्रष्टाचार की जांच करे, क्योंकि यह एक बड़ा घोटाला है।

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