Guards set outside the hotel building if brahmin mahasabha

राजस्थान सरकार के रियायती जमीन पर निर्देशों के बाद राजस्थान ब्राह्मण महासभा के छात्रावास पर गर्माएगी सियासत

जयपुर

छात्रावास बना नहीं, रियायती जमीन पर संचालित हो गया महालक्ष्मी मार्केट

जयपुर। राजस्थान सरकार में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कल ही रियायती दरों पर जमीन आवंटन का भौंतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह आवंटन की शर्तों का मौके पर पालना नहीं होने की स्थिति में आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई करे। आज-कल में इसके आदेश भी जारी हो जाएंगे।

इसी के साथ ही मालवीय नगर स्थित राजस्थान ब्राह्मण महासभा छात्रावास का मामला उछलने लगा है। यहां छात्रावास की जमीन पर दुकानें बनाकर मार्केट संचालित किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या धारीवाल सबसे पहले अपने ही विधायक पर कार्रवाई कर नजीर पेश करेंगे?, क्योंकि महासभा के अध्यक्ष कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा हैं।

छात्रावास की जमीन पर दुकानों का निर्माण, बिक्री और मार्केट संचालन से समाज के लोग काफी नाराज हैं। समाज द्वारा इस कृत्य को गलत बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि महिला छात्रावास की जगह पर मार्केट का संचालन कैसे हो सकता है। यह सीधे-सीधे समाज की छात्राओं की सुरक्षा का मामला है।

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अवैध निर्माण पर निगम ने दिया है नोटिस

नगर निगम ग्रेटर के मालवीय नगर जोन के उपायुक्त की ओर से मालवीय नगर सेक्टर-3 गुरुद्वारे के पास बन रहे छात्रावास में अवैध निर्माण कर महालक्ष्मी मार्केट के संचालन पर राजस्थान ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष, सचिव और निर्माणकर्ता को नोटिस दिया गया है और कहा गया है कि संस्थान को स्वीकृत नक्शे में कार पार्किंग के स्थान पर जीरो सेटबैक पर दुकानों का निर्माण कराया गया है, जो कि अवैध है। निगम की ओर से अवैध निर्माण पर महासभा से तीन दिनों में जवाब मांगा था, नहीं तो कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। नोटिस जारी हुए आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई न होना बताता है कि मामला कुछ और है।

निरस्त हो चुकी है निर्माण स्वीकृति

नगर निगम की ओर से छात्रावास के लिए जारी भवन निर्माण स्विकृति की शर्तों के अनुसार भवन की स्वीकृति अपने आप निरस्त हो चुकी है। स्वीकृति की शर्त 5 के अनुसार मानकों का उल्लंघन होने पर निर्माण रोका जा सकता है। इसे आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त किया जा सकता है। अनुमोदित मानचित्रों से भिन्न निर्माण किए जाने पर अनुमोदन स्वत: निरस्त समझा जाएगा और समस्त निर्माण को अवैध की श्रेणी में गिना जाएगा। ऐसे में इस मार्केट में बेची गई दुकानें भी अवैध हो गई हैं।

नोटिस कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का परिणाम

सूत्रों का कहना है कि छात्रावास को मिला नोटिस कांग्रेस की अंदरूनी सियासत का परिणाम है। अधिकांश समाजों को मिली रियायती जमीनों पर थोड़ा-बहुत वाणिज्यिक कार्य तो चलता ही है, इसी से सामाजिक संगठनों का कार्य चलता है। दो महीने पूर्व सरकार मे चले सियासी संग्राम और तख्तापलट की कोशिशों के बीच राजस्थान ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष और विधायक भंवरलाल शर्मा का नाम आगे रहा था।

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हालांकि कांग्रेसी विधायकों की हरियाणा में बाड़ाबंदी के बाद सबसे पहले शर्मा ही जयपुर पहुंचे थे और उन्होंने सरकार के सामने साफ कर दिया था कि उनका पायलट गुट से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन अभी तक पायलट और गहलोत गुट में तकरार चली आ रही है। शायद इसीलिए छात्रावास को नोटिस की कार्रवाई की गई है। अब यदि छात्रावास के लिए जमीन आवंटन को सरकार की ओर से निरस्त किया जाता है, तो प्रदेश में फिर से सियासी संग्राम खड़ा हो सकता है, क्योंकि इसे बदले की कार्रवाई माना जाएगा।

सभी संस्थाएं कर रही वाणिज्यिक उपयोग

नोटिस के संबंध में महासभा के अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा से फोन पर पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनके फोन स्विचऑफ मिले। महासभा के सभापति व निर्माणकर्ता सुभाष पाराशर ने कहा कि निगम ने हमें नोटिस दिया था, लेकिन हमने निगम को जवाब दे दिया है कि हमने 30 फीसदी सेटबैक छोड़ रखा है।

जब उनसे सवाल किया गया कि यदि आपका निर्माण सही है और निगम ने नोटिस दिया है, तो क्या मानें कि सरकार ने बदले की भावना से आपको नोटिस दिया है, तो इस सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली और कहा कि पूरे प्रदेश में रियायती दरों पर जमीनें लेने वाली संस्थाएं ने अपनी जमीन में वाणिज्यिक गतिविधियां चला रखी है। छात्रावास के पास गुरुद्वारा है, वहां भी दुकानें बनीं हैं, तो फिर हमने क्या गलत कर लिया। छात्राओं की सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना हमारे समाज का काम है।

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