be pressure on the center: Gehlot

छोटे बच्चों (young children) का टीकाकरण (vaccination) जल्द शुरू हो, हर आयु वर्ग को लगे बूस्टर डोज (booster dose), केंद्र पर बनाएंगे दबाव: गहलोत (Gehlot)

जयपुर

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Gehlot) ने कहा कि केंद्र सरकार को सभी बच्चों विशेषतौर पर छोटे बच्चों (young children) के लिए भी टीकाकरण (vaccination) शुरू करना चाहिए। केवल 15 से 18 साल के बच्चों से काम नहीं चलेगा। हमें सभी बच्चों को टीका लगाना चाहिए, क्योंकि बच्चे इस देश का भविष्य है। सभी आयु के लोगो को बूस्टर डोज (booster dose) लगना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

गहलोत ने कहा कि यह साबित हो गया है कि कोविड से बचाव के लिए वैक्सीनेशन सबसे कारगर उपाय है। ऎसे में हर आयु वर्ग का वैक्सीनेशन होना बेहद जरूरी है। दुनिया के कई मुल्कों में छोटे बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार भारत में भी छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन जल्द प्रारंभ करे और बूस्टर डोज का दायरा बढ़ाए, क्योंकि हर आयु वर्ग में को-मोर्बिड रोगी पाए जाते हैं।

गहलोत शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास से वीसी के माध्यम से कोविड वैक्सीनेशन तथा कोविड की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। देश में बच्चों की एक बड़ी आबादी है। उनका टीकाकरण आवश्यक रूप से होना चाहिए और उनके स्वास्थ्य की रक्षा हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

राजस्थान वैक्सीनेशन के मामले में देश में मॉडल स्टेट है। प्रदेश में अब तक 18 वर्ष से अधिक के 92 प्रतिशत से अधिक लोगों को वैक्सीन की पहली तथा करीब 78 प्रतिशत लोगों को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। किशोर एवं किशोरियों का टीकाकरण भी पूरी मुस्तैदी से किया जा रहा है। मात्र 4 दिन में ही 15 से 18 वर्ष के 30 प्रतिशत से अधिक किशोर एवं किशोरियों को वैक्सीन लगा दी गई है। जो लोग जागरूकता के अभाव में अब तक वैक्सीनेशन से वंचित रह गए हैं, उनका वैक्सीनेशन कर शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करें।

मंत्रिपरिषद् के सदस्यों से लेकर पंचायत स्तर के सभी जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं स्वयं सेवी संस्थाएं लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करें। साथ ही, कोविड प्रोटोकॉल की पालना के लिए लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि दूसरी लहर के दौरान संक्रमित हुए लोगों में पोस्ट-कोविड की जटिलताएं देखने को मिली हैं। कई लोगों में आज तक इसका असर दिख रहा है। ओमिक्रॉन के दुष्प्रभावों को लेकर भी हमें सचेत रहने की आवश्यकता है।

चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि प्रदेश में सफल वैक्सीनेशन अभियान के कारण संक्रमण की तीसरी लहर में मृत्युदर को नियंत्रित करने में हम कामयाब रहे हैं।

प्रमुख सचिव चिकित्सा वैभव गालरिया ने प्रस्तुतीकरण में बताया कि राज्य में एक्टिव केसेज 7 हजार 200 से अधिक हो गए हैं। संतोषजनक बात यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या केवल 302 है। प्रतिदिन करीब 8 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। मात्र 4 दिन में 15 से 18 आयु वर्ग के करीब 16 लाख लाभार्थियों को वैक्सीन लगाई गई है। शिक्षण एवं अन्य संस्थानों में वैक्सीनेशन तथा जागरूकता में सहयोग के लिए 358 वाहनों की स्वीकृति जारी की गई है।

गालरिया ने कहा कि सभी जिला कलेक्टर अपने-अपने जिलों में 9 एवं 10 जनवरी को नए ऑक्सीजन प्लांट की मॉक ड्रिल सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 360 स्वास्थ्य केन्द्रों जिनमें मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है, उनका 104 टीमें गठित कर ऑडिट करवाई जा रही है। साथ ही, नए आईसीयू और एचडीयू के संचालन के लिए कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी सहित अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने कोविड संक्रमण की स्थिति, वायरस के प्रभाव और बूस्टर डोज के संबंध में विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हर आयु वर्ग में सहरूगणता पायी जाती है, इसलिए बूस्टर डोज सभी को लगाई जानी चाहिए। साथ ही, 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को भी वैक्सीन लगाई जानी चाहिए।

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