New guidelines of Rajasthan government to break the chain of transition, full weekend curfew will be on Saturday-Sunday

भ्रष्ट कार्मिकों की अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय जल्द हो

जयपुर

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्मिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति देने को लेकर निर्धारित समयावधि में निर्णय करने की पुख्ता व्यवस्था कायम की जाए। अभियोजन स्वीकृति में देरी से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ता है।

गहलोत मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर एसीबी के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि विभागीय स्तर पर अभियोजन स्वीकृति में देरी होने पर मुख्य सतर्कता आयुक्त के पास प्रकरण भेजने की व्यवस्था को स्थानीय निकायों के कार्मिकों के लिए भी लागू किया जाए।ब्यूरो को भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए गहलोत ने कहा कि ब्यूरो अपनी इंटेलीजेंस विंग को और अधिक चौकस बनाकर मजबूती के साथ काम करे।

सरकारी कार्मिकों के लिए जरूरी हो सम्पत्ति की घोषणा

गहलोत ने निर्देश दिए कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए मुख्य सतर्कता अधिकारी लगाने की व्यवस्था को पुख्ता बनाया जाए। अखिल भारतीय सेवा, राज्य सेवा सहित राजपत्रित अधिकारियों द्वारा प्रतिवर्ष की जाने वाली ऑनलाइन सम्पत्ति की घोषणा को सभी सरकारी कार्मिकों के लिए भी अनिवार्य किया जाए।

1064 हैल्पलाइन का व्यापक प्रचार करें

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत के लिए एसीबी की हैल्पलाइन 1064 के अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। सभी सरकारी कार्यालयों में इस हैल्पलाइन की जानकारी देने वाले पोस्टर चस्पा किए जाएं। करीब तीन माह में ही इस हैल्पलाइन पर आय से अधिक सम्पत्ति, पद के दुरूपयोग तथा रिश्वत मांगने की 1107 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसके आधार पर ब्यूरो को ट्रेप की 25 कार्रवाई करने में भी सफलता मिली है। गहलोत ने शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को उचित संरक्षण दिया जाए ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

मुख्य सचिव राजीव स्वरूप ने कहा कि राज्य सरकार ने एसीबी को बेहतर कामकाज के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं रखी है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों की तफ्तीश में सहयोग के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट के पैनल तथा विधिक सहयोग के लिए अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई है।

एसीबी महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस को आधार मानते हुए एसीबी ने पिछले करीब पौने दो साल में ट्रेप की 500 से अधिक कार्रवाई अंजाम दी है। इस मामले में राजस्थान देशभर में दूसरे स्थान पर है। ट्रेप के प्रकरणों में सजा का औसत 54 प्रतिशत रहा है।

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