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कांग्रेस के समीकरण फेल, या फायदे में रही भाजपा

राजनीति

ग्रेटर में भाजपा का बोर्ड, हैरिटेज में कांग्रेस

जोधपुर में बराबरी, कोटा में एक बोर्ड पर टक्कर

जयपुर। कांग्रेस ने जिस सोच के साथ वार्डों का परिसीमन किया और वार्ड संख्या बढ़ाकर तीन शहरों में दो-दो बोर्ड बनाए उसका फायदा कांग्रेस को या उनके समीकरण फेल रहे और भाजपा फायदे में रही, यह इस समय सबसे अधिक चर्चा का विषय है। भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि कांग्रेस जो चाहती थी, वह नहीं हो पाया, वहीं कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि उनके समीकरण कामयाब रहे।

भाजपा ने जयपुर ग्रेटर में 88 सीट और हैरिटेज में 42 सीटें मिलाकर कुल 130 सीटें जीती हैं। यदि बोर्ड एक ही रहता तो 250 सीटों पर बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पास ही रहता। ऐसे में कहा जा रहा है कि जयपुर में जनमत भाजपा के साथ रहा है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पिछले बोर्ड में भाजपा के पास 91 में स 67 सीटें थी, ऐसे में ताजा चुनावों के नतीजों के आधार पर कांग्रेस ने भाजपा के गढ़ में सेंध लगा दी है।

भाजपा के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने दो बोर्डों की व्यवस्था अपने फायदे के लिए की है, लेकिन तीन साल बाद यदि भाजपा फिर से प्रदेश में सत्ता में आती है तो वह इस व्यवस्था को बदलकर फिर से एक बोर्ड बना देगी और चुनाव कराएगी, क्योंकि एक बोर्ड होने पर वह इन शहरों में आसानी से बहुमत प्राप्त कर लेगी। इस दौरान भाजपा वार्डों के परिसीमन को भी बदल सकती है, क्योंकि भाजपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस ने वार्डों के परिसीमन में काफी विसंगतियां है। यदि वार्डों का फिर से परिसीमन होता है तो भविष्य में निकाय चुनावों में कांग्रेस की सीटों में फिर से कमी आ जाएगी।

एक बोर्ड करना या फिर से परिसीमन कराने पर भी भाजपा में दो मत हैं और पार्टी में ही कुछ लोग अधिक बोर्ड होने के फायदे गिना रहे हैं। कहा जा रहा है कि यदि परिसीमन गलत हुआ है तो फिर परिसीमन के समय भाजपा ने विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया। परिसीमन के बाद कई बार विधानसभा की बैठकें हो चुकी है, उसमें भी भाजपा की ओर से परिसीमन का विरोध क्यों नहीं किया गया?

हैरिटेज में कांग्रेस

जयपुर के दो बोर्ड में एक भाजपा के पास आ चुका है। जयपुर ग्रेटर 150 सीटों में से भाजपा को 88, कांग्रेस को 49 और निर्दलियों को 13 सीट मिली है। यहां भाजपा को बोर्ड बनेगा। वहीं हैरिटेज में कांग्रेस का बोर्ड बन सकता है। कहा जा रहा है कि अधिकांश निर्दलीय कांग्रेस के पक्ष में जा सकते हैं। हैरिटेज की 100 सीटों में भाजपा को 42, कांग्रेस को 47 और निर्दलियों को 11 सीट मिली है।

कोटा में निर्दलीय बने किंगमेकर

कोटा दक्षिण में निर्दलीय जीत कर आए पार्षद किंगमेकर बन गए हैं। कोटा दक्षिण की 80 सीटों में भाजपा और कांग्रेस को 36-36 सीटें मिली है। यहां 8 निर्दलीय जीते हैं। ऐसे में यहां का बोर्ड भी उस पार्टी का बनेगा, जिसके साथ निर्दलीय आते हैं। यहां भी दोनों ही पार्टियां निर्दलियों को अपने खेमे में लेने की भरपूर कोशिश कर रही है। वहीं कोटा उत्तर की 70 सीटों में से भाजपा को 14, कांग्रेस को 47 और निर्दलियों को 9 सीट मिली है।

जोधपुर में बराबरी

जोधपुर में मामला बराबरी पर रहा है और यहां एक बोर्ड कांग्रेस का तो एक बोर्ड भाजपा का बनेगा। जोधपुर उत्तर की 80 सीटों में से कांग्रेस को 53, भाजपा को 19 और निर्दलियों को 8 सीट मिली है। वहीं जोधपुर दक्षिण की 80 सीटों में से कांग्रेस को 29, भाजपा को 43 और निर्दलियों को 8 सीटें मिली है।

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