जयपुर में चार दिनों से विद्याधर नगर (Vidyadhar Nagar) में नगर निगम जयपुर ग्रेटर की ओर से कोरोना काल के दौरान कच्ची बस्ती को बलपूर्वक हटने का मामला तूल पकड़े हुए था और राजनीतिक बयानबाजियां जोरों पर थी। इस बीच मंगलवार को आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के जनोपयोगी भवन में टीकाकरण केंद्र पर भाजपा पार्षद ने हंगामा खड़ा कर दिया और वैक्सीन लगाने में भेदभाव का आरोप लगाया। इसके तुरंत बाद ही भाजपा नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए।
इन दोनों मामलों में देखने वाली बात यह है कि ग्रेटर महापौर सौम्या गुर्जर जोर-शोर से विद्याधर नगर प्रकरण को उठा रही है, लेकिन भाजपा की ओर से एक भी कार्यकर्ता यहां विरोध के लिए नहीं पहुंचा। वहीं दूसरी ओर एक पार्षद के मामले में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाजपा नेता थाने पहुंच गए।
पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो विद्याधर नगर मामले में शहर भाजपा गायब दिखाई दे रही है। यदि कोरोना काल में आयुक्त ने गलत कार्रवाई की तो फिर भाजपा की ओर से जिला कलेक्टर, स्वायत्त शासन विभाग, मुख्य सचिव को आयुक्त की शिकायत क्यों नहीं की गई? आखिर क्या कारण है कि केंद्रीय मंत्री द्वारा बयान जारी किए जाने के बाद भी शहर भाजपा, भाजपा विधायक और विधायक प्रत्याशी इस मामले में चुप्पी साधे हैं?
पार्षद के मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर दिया, फिर वही कार्यकर्ता कच्ची बस्ती प्रकरण में क्यों नहीं धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। क्यों नहीं आयुक्त के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है? क्यों भाजपा के सारे पार्षद चुप बैठे हैं, क्या वह आयुक्त के खिलाफ निगम मुख्यालय पर धरना भी नहीं दे सकते?
देखने में ऐसा लग रहा है मानो पूरी भाजपा इस समय महापौर सौम्या गुर्जर के खिलाफ खड़ी है और कोई मदद नहीं कर रही, लेकिन राजनीति के जानकारों का कहना है कि स्थिति इससे एकदम उलट है और शहर भाजपा में सौम्या गुर्जर को ज्यादा समर्थन नहीं है, लेकिन इस प्रकरण में पूरी भाजपा उनके साथ खड़ी है और अब प्रयास किए जा रहे हैं कि इस मामले को जल्द से जल्द दफन कर दिया जाए। भाजपा में कहा जा रहा है कि इस मामले में कोई न कोई पेंच जरूर है, जिसके चलते पूरी भाजपा एक है और महापौर के पक्ष में खड़ी है। भाजपा की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
विवादित टूलकिट अमल में ला रही राजस्थान भाजपा
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पूरे देश में इन दिनों भाजपा कांग्रेस पर टूलकिट बनाने और प्रधानमंत्री को बदनाम करने के आरोप लगा रही है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि राजस्थान में भाजपा उसी टूलकिट पर काम कर रही है। कोरोना काल में भाजपा प्रदेश सरकार को बदनाम करने में जुटी है। यदि विद्याधर नगर मामले में महापौर और चेयरमैन दूध के धुले हैं तो फिर महापौर या फिर भाजपा सरकार से इस प्रकरण की जांच की मांग क्यों नहीं करते हैं। यदि उन्हें लगता है कि आयुक्त दोषी हैं तो फिर आयुक्त के खिलाफ शिकायत करनी चाहिए। केवल अखबारों में बयानबाजी से तो साफ समझ में आ रहा है कि भाजपा सिर्फ प्रदेश सरकार को अस्थिर और बदनाम करने की कोशिशों में लगी है। भाजपा को इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करनी चाहिए, तभी जनता के सामने सच सामने आएगा।
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विद्याधर नगर गए, लेकिन नहीं मिले प्रभावितों से
पीपल पूर्णिमा पर भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया, विधायक नरपत सिंह राजवी ने उप महापौर पुनीत कर्णावट के साथ विद्याधर नगर में पीपल के पौधे का रोपण किया, लेकिन यह नेता विद्याधर नगर में ही मौजूद उजाड़ी गई कच्ची बस्ती के प्रभावित गरीबों से मिलने तक नहीं पहुंचे। इससे साफ होता है कि भाजपा अब इस मामले को दबाने में जुटी है, नहीं तो यह नेता कच्ची बस्ती पहुंचते और सरकार को ताने जरूर देते।