Officers must register presence in CEO's room at Jaipur Municipal Corporation Greater Headquarters

ग्रेटर महापौर जयपुर ने चुना अंतिम विकल्प

जयपुर
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बीवीजी कंपनी को सांगानेर में दिखाया बाहर का रास्ता

जयपुर। राजधानी की बदहाल सफाई व्यवस्था को देखते हुए नगर निगम ग्रेटर की महापौर ने अंतिम विकल्प चुनते हुए शहर में डोर-टू-डोर सफाई व्यवस्था में नाकाम बीवीजी कंपनी को सांगानेर जोन का काम छीन लिया है। नगर निगम ग्रेटर की सफाई व्यवस्था पर आयोजित बैठक में मंगलवार को महापौर सौम्या गुर्जर ने यह निर्णय लिया। नगर निगम यदि सांगानेर में सफाई व्यवस्था में कामयाब रहा तो अन्य जोनों में भी धीरे-धीरे बीवीजी से काम छीन कर उसे ग्रेटर से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार बैठक में ग्रेटर के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी, अधिशाषी अभियंता प्रोजेक्ट, अधिशाषी अभियंता गैराज और सांगानेर जोन के डीसी की एक कमेटी बनाई गई है, जो तीन दिनों में सांगानेर जोन में निगम की ओर से डोर-टू-डोर सफाई व्यवस्था की कार्ययोजना तैयार करके महापौर को अवगत कराएगी और जल्द से जल्द जोन में निगम की ओर से सफाई व्यवस्था शुरू कराएगी।

बैठक में महापौर की ओर से कहा गया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के फंड से 100 हूपर और 25 कॉम्पेक्टर की खरीद की गई है। इनमें से 50 हूपर और 13 कॉम्पेक्टर ग्रेटर को मिले हैं। इन्हीं संसाधनों से सांगानेर जोन में डोर-टू-डोर का काम कराया जाएगा। महापौर की ओर से कहा गया कि यदि सांगानेर जोन में यह कार्रवाई सफल रही तो अन्य जोनों में भी धीरे-धीरे करके बीवीजी का काम खत्म कर दिया जाएगा।

गुर्जर ने बैठक में निर्देश दिए कि ग्रेटर में जो सफाईकर्मी सफाई कार्य नहीं कर रहे, उन्हें तुरंत सफाई कार्य में लगाया जाए। सेटिंगबाजी करके जो सफाईकर्मी अन्य शाखाओं में लगे हैं, उन्हें वहां के डीसी तत्काल सफाई कार्य के लिए भेजें। इस दौरान वार्डों में सफाईकर्मियों के समान बंटवारे और बीवीजी के संसाधनों के भी समान बंटवारे के निर्देश दिए गए। इस दौरान बैठक में नहीं आने वाले सीएसआई रोशन लाल को वार्ड पार्षद से खराब व्यवहार रखने, हाजिरी रजिस्टर मेंटेन नहीं करने पर 17 सीसी नोटिस देने के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान बीवीजी कंपनी की ओर से फिर पुराना राग अलापा गया और कहा गया कि उसके निगम में 20 करोड़ रुपए बकाया है। इस पर महापौर ने व्यवस्था दी कि भुगतान के लिए अलग से बैठक कर चर्चा की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि क्लियर न्यूज ने सोमवार को ही ‘दो महापौर और सरकार नहीं सुधार पाए, क्या नई महापौर दिखा पाएंगी बीवीजी को बाहर का रास्ता’ खबर प्रकाशित कर बीवीजी कंपनी की ओर से सफाई कार्यों में वर्षों से की जा रही लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर किया था और बताया था कि इस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाए बिना जयपुर की सफाई व्यवस्था सुधरने वाली नहीं है। इसी का नतीजा है कि आज महापौर को सख्त निर्णय लेना पड़ा और बीवीजी से सांगानेर का काम छीनकर कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने की शुरूआत कर दी है। हालांकि कंपनी अपनी आदतों के अनुरूप अब शहर की सफाई व्यवस्था में गड़बड़ी करने की कोशिश करेगी, निगम को न्यायालय में घसीटेगी, लेकिन यदि निगम ने सख्ती से कार्य किया तो कंपनी को जयपुर से भागने में भी देर नहीं लगेगी।

निगम का सराहनीय कदम

बीवीजी कंपनी के खिलाफ एसीबी में परिवाद दर्ज कराने वाले पूर्व पार्षद अनिल शर्मा का कहना है कि ग्रेटर महापौर सौम्या गुर्जर द्वारा सांगानेर जोन में बीवीजी कंपनी का काम छीनना सराहनीय कदम है। इस तरह के कदमों में बीवीजी की ब्लैकमेलिंग कम होगी। नगर निगम को अब आगे ओपन डिपो का टेंडर करने की तैयारी भी कर लेनी चाहिए, क्योंकि अब यह कंपनी बार-बार काम बंद करने और पिछला बकाया की मांग करेगी। यदि ओपन डिपो के टेंडर हो जाते हैं तो कंपनी काम बंद करने की धमकियां नहीं दे पाएगी। जिस जगह कंपनी काम बंद करे, वहीं पर निगम ओपन डिपो उठाने शुरू कर दे, क्योंकि कंपनी भी डोर-टू-डोर करने के बजाए ओपन डिपो ही उठा रही है। ओपन डिपो का ठेका होने से निगम के राजस्व की हानि भी रुकेगी, क्योंकि कंपनी 550 रुपए प्रतिटन का काम 1800 रुपए में कर रही है। कंपनी को जो बिना काम के भुगतान किया जा रहा है, उस पैसे से निगम अपने संसाधन खड़े कर पाएगा।

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