वाल्मिकी समाज के कारण भाजपा के हाथ से गया नगर निगम हैरिटेज

जयपुर राजनीति

उपमहापौर के लिए भाजपा खेल सकती है एससी पर दांव

जयपुर। नगर निगम हैरिटेज के चुनावों में शहर का वाल्मिकी समाज भाजपा के विरोध में चला गया और भाजपा को इस निगम से हाथ धोना पड़ा। समाज की नाराजगी को दूर करने के लिए अब भाजपा हैरिटेज में वाल्मिकी समाज के पार्षद को उपमहापौर पद के लिए प्रत्याशी बना सकती है।

हालांकि भाजपा के पास यहां बहुमत नहीं है, फिर भी कहा जा रहा है कि जोड़-जुगाड़ करके भाजपा यहां अपना बोर्ड बना लेगी। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि यहां से वाल्मिकी समाज के पार्षद को प्रत्याशी बनाकर भाजपा इस समाज की नाराजगी को दूर करना चाहती है, ताकि भविष्य में यह समाज पार्टी के साथ बना रहे।

नगर निगम हैरिटेज में वाल्मिकी समाज के वोटरों की बड़ी तादाद है। किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में 18 हजार, हवामहल विधानसभा क्षेत्र में 25 हजार, आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में 35 हजार और सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में 20 हजार वोटर हैं। यह सभी वोट एकमुश्त कांग्रेस को गए, जिससे भाजपा को बहुमत नहीं मिल पाया और कांग्रेस वाल्मिकी समाज की नाराजगी का फायदा ले गई।

वाल्मिकी समाज के पंच-पटेल खुलेआम भाजपा के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं। उनका विरोध नगर निगम में पिछले बोर्ड में हुई सफाईकर्मियों की भर्ती और हाथरस कांड को लेकर है। वाल्मिकी समाज चाहता था कि सफाईकर्मियों की भर्तियों में सिर्फ उनके समाज के लोगों को ही नौकरियां मिले, लेकिन अन्य समाजों के लोगों की भी भर्तियां कर ली गई, जिससे उनके समाज के लोगों को नुकसान हुआ है। भाजपा बोर्ड ने राजनीतिक फायदे के लिए भर्तियां निकाली, लेकिन अब नए भर्ती हुए सफाईकर्मियों को स्थाईकरण के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।

भाजपा ने समाज की भलाई के लिए निकाली भर्तियां

भाजपा सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने शहर में पांच हजार सफाईकर्मियों की भर्ती कराई, लेकिन उसका उसे फायदा नहीं मिल पाया। बड़ी संख्या में भर्तियों के बावजूद वाल्मिकी समाज ने भाजपा से दूरी बना ली, जबकि भाजपा ने तो समाज के फायदे के लिए ही भर्तियां की थी। भर्तियों से पूर्व डीएलबी ने फाइनेंस का हवाला देते हुए साफ कह दिया था कि वह नई भर्तियों के लिए वित्त की व्यवस्था करने में असमर्थ है, नगरीय निकाय यदि नए सफाईकर्मियों के वेतन की व्यवस्था कर सकते हैं तो वह भर्तियां निकाल सकते हैं। उस समय के भाजपा बोर्ड ने समाज को फायदा पहुंचाने के लिए अपने स्तर पर भर्तियों की व्यवस्था कर दी।

कार्रवाई के उठे सुर

हैरिटेज में हार के बाद भाजपा में गहन मंथन हुआ, कहा जा रहा है कि हैरिटेज में हार के लिए पिछले बोर्ड को जिम्मेदार बताया गया और कहा कि बोर्ड ने वाहवाही लूटने के लिए डीएलबी के निर्देशों को नजरअंदाज कर भर्तियां की। वाल्मिकी समाज की हमेशा से ही मांग रहती है कि सफाईकर्मियों की भर्तियों में सिर्फ उनके समाज के लोगों को ही नौकरियां दी जाए, जबकि नियमों के तहत यह संभव नहीं होता, ऐसे में बिना वजह विधानसभा चुनावों से पूर्व बोर्ड ने यह विवादों का पिटारा खोल दिया, जिसका खामियाजा भाजपा को विधानसभा में और अब निगम चुनावों में भुगतना पड़ा, ऐसे में तत्कालीन बोर्ड के मुखिया के खिलाफ कार्रवाई करे।

स्थाई करो, नहीं तो दीपावली पर कार्य बहिष्कार

नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज के नए बनने वाले महापौरों को पद संभालते ही सबसे पहले सफाईकर्मियों के स्थाईकरण की समस्या से दो-चार होना पड़ेगा। संयुक्त वाल्मिकी एवं सफाई श्रमिक संघ ने दोनों निगमों के आयुक्तों को ज्ञापन दिया है कि 2018 में नियुक्ति पाए सफाईकर्मियों को दो वर्ष कार्य करने के बाद स्थाई वेतन दिया जाए।

संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने कहा कि स्थाई वेतनमान नहीं दिए जाने के कारण सफाईकर्मियों में रोष है। पूर्व में भी इस बाबत संघ की ओर से आगाह किया जा चुका है, लेकिन नए सफाईकर्मियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में निगम प्रशासन स्थाईकरण के आदेश निकाले, नहीं तो दीपावली पर समस्त सफाईकर्मी सफाई कार्य का बहिष्कार करेंगे।

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