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राजस्थान में भाजपा ने शुरू किया अल्पसंख्यकों को कांग्रेस से दूर करने का काम

राजनीति

जयपुर। पिछले विधानसभा चुनावों में राजस्थान की सत्ता भाजपा के हाथों में आने से कुछ ही कदम दूर छिटक गई थी, इसका मलाल आज तक भाजपा को है। इस शिकस्त को भाजपा आज तक नहीं पचा पाई है और अब भाजपा कांग्रेस के मुख्य वोटबैंक अल्पसंख्यक वर्ग को उनसे दूर करने की कोशिशों में जुट गई है। भाजपा के इस दांव से कांग्रेस चारों खाने चित्त हो चुकी है और कांग्रेस के बड़े नेता कोशिश कर रहे है कि अल्पसंख्यक वर्ग कांग्रेस से नहीं छिटके।

इसके लिए भविष्य में सरकार की ओर से अल्पसंख्यक वर्ग को खुश करने के लिए कई सौगातें दी जा सकती है। राजनैतिक नियुक्तियों में भी उन्हें फायदा दिया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि यदि कांग्रेस ने अल्पसंख्यक वर्ग को खुश करने की कोशिश की तो भाजपा की ओर से कांग्रेस पर तुष्टीकरण के आरोप मढ़े जाएंगे और भाजपा में भी वोटरों के ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो जाएगी।

बुधवार को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। मोर्चा ने आरोप लगाया है कि सरकार अल्पसंख्यक वर्ग की अनदेखी कर रही है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री का ध्यान अल्पसंख्यकों के विभिन्न बोर्डों के गठन नहीं होने, स्कूल-कॉलेजों में उर्दू शिक्षकों के पद नहीं भरने के साथ कई अन्य मामलों पर दिलाया गया है। जयपुर में मोर्चा के प्रदेशअध्यक्ष मोहम्मद सादिक के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान खान ने कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश में अल्पसंख्यकों का सिर्फ वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। ओवैसी के सवाल पर उन्होंने मीडिया से कहा कि हम चाहते हैं कि ओवैसी की पार्टी राजस्थान आकर चुनाव लड़े। हम खुद उनका स्वागत करेंगे।

राजनीति के जानकारों का कहना है कि अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से ज्ञापन की यह कार्रवाई अल्पसंख्यकों को कांग्रेस से दूर करने का प्रथम कदम है। भविष्य में भाजपा कई अन्य मामलों में अल्पसंख्यकों को कांग्रेस का विरोध करने के लिए उकसा सकती है। विरोध को इस तरह से हवा दी जाएगी कि इसकी खबरें पूरे देश में सुर्खियां बने। यह खबरें एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी तक पहुंचे और वह अगले विधानसभा चुनावों में प्रदेश के मुस्लिम वोटरों की ओर आकर्षित होकर यहां अपने उम्मीदवार उतार दे।

नगर निगम हैरिटेज बना कांग्रेस के जी का जंजाल

कांग्रेस ने नगरीय निकायों में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए तीन शहरों में दो-दो निगम बनाए थे। जयपुर में नगर निगम हैरिटेज अल्पसंख्यक वोटरों के भरोसे बनाया गया था, लेकिन यहां अल्संख्यक वर्ग से महापौर नहीं बनाने के कारण मुस्लिम समाज कांग्रेस से नाराज हो गया। जोधपुर में भी यह विवाद देखने को मिला। ऐसे में भाजपा ने भी अब अल्पसंख्यकों को हथियार बनाकर कांग्रेस के वोट बैंक को निशाना बनाने की सोच ली है। जानकारी में आया है कि यह सारा खेल भी हैरिटेज निगम की तीन विधानसभा सीटों पर हारे भाजपा प्रत्याशियों की ओर से खेला जा रहा है, जिसे अब पूरी भाजपा का समर्थन है।

आदर्श नगर है केंद्र

भाजपा में कहा जा रहा है कि इस खेल का केंद्र आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र है। भाजपा के वरिष्ठ नेता को इस सीट पर अल्पसंख्य वोटों के कारण हार का मुंह देखना पड़ा था। सूत्र बताते हैं कि हैरिटेज निगम में अल्पसंख्यकों के नाराज होते ही भाजपा को अल्पसंख्यक वर्ग को कांग्रेस से दूर करने का सूत्र मिल गया और इसके लिए पूरी योजना बना ली गई है।

बिहार चुनावों से मिला उत्साह

बिहार विधानसभा के चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने दस से अधिक सीटों पर कांग्रेस के एकाधिकार वाले अल्पसंख्यक वोट काटे और पांच प्रत्याशियों को जिता लाए। बिहार चुनावों से उत्साहित होकर भाजपा में अल्पसंख्यक वर्ग को कांग्रेस से काटने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया। कहा जा रहा है कि पूरे प्रदेश में ज्ञापन दिलाने वाले भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशअध्यक्ष भी इन्हीं बड़े नेता के करीबी हैं।

उल्लेखनीय है कि क्लियर न्यूज ने सबसे पहले 11 नवंबर को ही ‘हैरिटेज निगम में मुस्लिम महापौर नहीं बनाने का मामला पहुंचा ओवैसी के पास’ खबर प्रकाशित कर बता दिया था कि ओवैसी की पार्टी राजस्थान में दस्तक दे सकती है। अल्पसंख्यक वर्ग के कुछ नेताओं ने महापौर नहीं बनाए जाने का मामला ओवैसी के पास पहुंचाया है और ओवैसी ने राजस्थान में 50 से अधिक और जयपुर में तीन विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यक वर्ग की निर्णायक स्थिति को देखकर राजस्थान में काफी दिलचस्पी दिखाई।

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