Jaipur mai 10 days ka meditation karenge Arvind Kegriwal

जयपुर (Jaipur) में 10 दिन साधना (meditation) करेंगे केजरीवाल, मोबाइल, टीवी, अखबार और लैपटॉप से रहेंगे दूर

जयपुर

स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रविवार को जयपुर (Jaipur) पहुंचे। केजरीवाल यहां 10 दिन गलताजी स्थित विपश्यना साधना (meditation) केंद्र में रहकर साधना करने आए हैं। इस दौरान केजरीवाल आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों के साथ कोई मीटिंग नहीं करेंगे। साथ ही, किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा नहीं लेंगे। रविवार दोपहर जयपुर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद केजरीवाल सीधा विपश्यना केंद्र पहुंचे।

केजरीवाल यहां विपश्यना साधना के अलग-अलग सत्र में हिस्सा लेंगेे। इस केंद्र में रहने वालों के लिए मोबाइल, टीवी, अखबार, लैपटॉप जैसी सुविधाओं के इस्तेमाल पर रोक है। पहले केजरीवाल के 3 दिन विपश्यना केंद्र में रहने की सूचना आई थी, बाद में बताया गया कि वे 10 दिन तक यहीं ठहरेंगे।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों को केजरीवाल के जयपुर आने की ऑफिशियल सूचना तक नहीं दी गई। विपश्यना साधना केंद्र राजस्थान के पुराने साधना केन्द्रों में शामिल है। यहां देशभर से लोग आते हैं। केजरीवाल पिछले कई वर्षों से विपश्यना ध्यान तकनीक का अभ्यास कर रहे हैं। वे समय-समय पर छुट्टी लेकर विपश्यना साधना के लिए नियमित रूप से जाते रहते हैं। इससे पहले नागपुर सहित अन्य कई जगहों पर स्थित विपश्यना केंद्र में रहकर साधना के ज़रिये स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं। केजरीवाल की गैरमौजूदगी में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बतौर प्रभारी उनके सरकारी कामकाज देखते हैं।

केजरीवाल के जयपुर आने के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं गरम हो गई। कहा जा रहा है कि पंजाब और गोवा के बाद आम आदमी पार्टी की नजर राजस्थान पर है। राजस्थान विधानसभा के चुनाव 2023 में होने हैं। इसके लिए आम आदमी पार्टी यहां अपनी सियासी पैठ बनाने में जुटी है। पिछले दिनों इसी कारण अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने राजस्थान के निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुडला से लंबी मुलाकात भी की थी।

केजरीवाल के दिल्ली निवास पर हुई इस बातचीत में राजस्थान में आप पार्टी से उन्हें जोड़ने और पार्टी का जनाधार मजबूत करने पर चर्चा हुई। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि राजस्थान में प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में चल रही फूट को देखकर अगले चुनावों में यहां तीसरा मोर्चा भी खड़ा हो सकता है।

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