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जयपुर (Jaipur) में झमाझम बारिश, सड़कें बनी दरिया, नालों में पानी उफान पर

जयपुर

सावन के पहले सोमवार पर मानसून जयपुर (Jaipur) पर मेहरबान हुआ और शाम को हुई झमाझम बारिश से सड़कें दरिया बन गई, नालों में पानी उफान पर आ गया। शाम छह बजे के करीब तेज बिजलियों की गड़गड़ाहट के साथ बारिश होने लगी। आधे घंटे की जोरदार बारिश में पूरा शहर पानी-पानी हो गया। बिजली की गडग़ड़ाहट से लोग सहम गए और उन्हें आमेर वॉच टॉवर हादसा याद आ गया। तेज बारिश के बाद प्रशासन को अलर्ट मोड पर कर दिया गया।

शहर में दो सप्ताह बाद झमाझम बारिश हुई है। इस दौरान स्टेच्यु सर्किल, चारदीवारी, जलमहल, विद्याधर नगर, वैशाली नगर, मुरलीपुरा, सीकर रोड, टोंक रोड, जेएलएन मार्ग, जगतपुरा, सांगानेर, डीसीएम, बनीपार्क, मोती डूंगरी, ट्रांस्पोर्ट नगर, जवाहर नगर इलाकों में भारी बारिश के कारण सड़कों पर जल जमाव हो गया। इस दौरान नाहरगढ़, झालाना, गलता तीर्थ और आमेर की पहाड़ियों में कई जगहों पर झरने बह निकले।

तेज बारिश के बाद शहर की फिजा एकदम से बदल गई और जो ऊमस कई दिनों से लोगों को परेशान कर रही थी, वह एकदम से गायब हो गई। सुहाने मौसम को देखकर लोगों ने भीगने का आनंद लिया, लेकिन शाम के समय कार्यालयों से घरों की ओर जाने वालेां के लिए परेशानी खड़ी हो गई, क्योंकि सड़कों पर पानी भरने से जगह-जगह जाम लग गया। जिन लोगों ने बारिश के बीच ही घरों की ओर निकलने की कोशिश की, उनके वाहन जल जमाव के कारण रास्ते में ही बंद हो गए।

शहर में बरसा पानी सी-स्कीम के गंदे नाले और जवाहर नगर नाले के जरिए दृव्यवती नदी में पहुंचा और नदी की सूरत को बिगाड़ कर रख दिया। बारिश बंद होने के बाद पूरे शहर का पानी इन दोनों नालों के जरिए बहने लगा, जिससे दोनों नाले ऊफान पर रहे। सफाई नहीं होने के कारण नालों में भरा कचरा पानी के साथ बहकर दृव्यवती नदी में समा गया।

करतारपुरा में गंदे नाले की नीची पुलिया के ऊपर दो से ढाई फीट तक पानी बह रहा था, जिसे पार करने की हिम्मत दुपहिया क्या चौपहिया वाहन तक नहीं कर सके। जिन्होंने नीची पुलिया पार करने की कोशिश की, उनके वाहन बीच में ही अटक गए। जोरदार बारिश ने नगर निगमों के नाला सफाई के दावों की पोल खोलकर रख दी। आधी-अधूरी सफाई के चलते शहर के हर गली-मोहल्ले में जल जमाव की स्थितियां देखी गई। बारिश के काफी देर बाद तक सड़कों का पानी नालियों में जा पाया। जहां नाला सफाई का कार्य चल रहा था, वहां बाहर निकाला गया मलबा फिर से पानी के साथ बहकर नालों में समा गया।

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