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जयपुर में खंड वृष्टि के योग

ज्योतिष विज्ञान जयपुर धर्म

अग्निकोण से वायु कोण की ओर रहा हवा का रुख

जयपुर। जयपुर की स्थापना के समय से चली आ रही वायु परीक्षण परिपाटी का निर्वाह करते हुए शनिवार को जंतर-मंतर वेधशाला के सम्राट यंत्र पर वायु परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान वायु का रुख अग्निकोण से वायुकोण की ओर रहा, जिससे शहर के ज्यातिषियों ने फलादेश निकाला है कि जयपुर के 100 किलोमीटर की परिधि में इस वर्ष खंड वृष्टि का योग बना है।

ज्योतिषी विनोद शास्त्री ने बताया कि शाम 7 बजकर 20 मिनट पर वायु परीक्षण शुरू हुआ। इस दौरान तेज गति से हवा चली और ध्वज का रुख अधिकांश समय पूर्व से पश्चिम की ओर रहा। कुछ समय के लिए ध्वज का रुख अग्निकोण से वायुकोण की ओर भी रहा।

वायु परीक्षण के दौरान तेज हवा चलने पर दुर्भिक्ष की आशंका रहती है, लेकिन इस वर्ष कुछ योग अच्छे बने हैं, जिससे सभी ज्योतिषाचार्यों ने इस वर्ष खंड वृष्टि का फलादेश दिया है। वायु परीक्षण के दौरान 36 योगों पर फलादेश किया गया।

यह रहे प्रमुख फलादेश

. संवत का गर्भाधान कार्तिक मास में माना जाता है। कार्तिक अमावस्या को रविवार होने से तथा रात्रि के अंतिम प्रहर में स्वाति नक्षत्र का प्रवेश महंगाई, महामारी, युद्ध, अशांति, प्रजा में चारों ओर भय का वातावरण बनाएगा।

. पौष अमावस्या को गुरुवार होने से धान्यादि की अच्छी पैदावार होने से सुख-शांति बनी रहेगी।

. फाल्गुनी पूर्णिमा को अर्थात होलिका दहन के समय अग्निशिखा दक्षिण की ओर होने से रोग अशांति का भय।

. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को मंगलवार होना राजनीति में उथल-पुथल, राज्यों में सरकार बदल जाना आदि संभव।

. चैत्र अमावस्या मंगलवार होने से रोग, टिड्डीदल, कीट-पतंगों का आक्रमण संभव।

. ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा शुक्रवार होने से अच्छी वर्षा और खाद्यान्नों की प्रचुरता संभव।

. आषाढ़ी अमावस्या को मृगशिरा नक्षत्र होने से सुभिक्ष-दुर्भिक्ष की आधी-आधी संभावना।

. आषाढ़ी पूर्णिमा को शनिवार और रविवार दोनों दिन होने से शनिवार दुर्भिक्ष कारक और रविवार रोगकारक है।

. कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को भरणी नक्षत्र होने से कहीं वृष्टि, कहीं अनावृष्टि।

. आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी में पूर्णिमा की घड़ियाँ अधिक होने से महंगाई बढ़ती है।