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नौकरी पर बन आई, अब होगी कार्रवाई

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हरकत में वन विभाग, पुरातत्व से मांगी नाइट ट्यूरिज्म अनुमति की पत्रावली

अवैध गतिविधियां रोकने के लिए भेजा जाएगा उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव

Nahargarh Fort 2

जयपुर। नाहरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य दशकों से चल रही अवैध गतिविधियों पर वन विभाग की नींद खुलने लगी है। अवैध गतिविधियों पर रोकथाम लगाने में असफल वन अधिकारियों को अब नौकरी पर संकट नजर आने लगा है, क्योंकि यह बहुत ही गंभीर मामला है। ऐसे में वन विभाग की ओर से नाहरगढ़ में शुरू किए गए नाइट ट्यूरिज्म पर पुरातत्व विभाग से जवाब तलब कर लिया गया है कि किस अनुमति से विभाग ने रिजर्व फॉरेस्ट में नाइट ट्यूरिज्म शुरू किया है।

उप वन संरक्षक वन्यजीव चिड़ियाघर जयपुर उपकार बोराणा ने बताया कि पुरातत्व विभाग की ओर से शुरू किए गए नाइट ट्यूरिज्म की मंजूरी तलब की गई थी, जिसे पुरातत्व विभाग ने भिजवा दिया है। अब विभाग वन अधिनियम के तहत इस मंजूरी की जांच कर रहा है कि क्या इस जगह नाइट ट्यूरिज्म हो सकता है या नहीं। यदि यह अनुमति वन अधिनियम के विरुद्ध हुई तो पुरातत्व विभाग को नाहरगढ़ फोर्ट में नाइट ट्यूरिज्म को बंद करने के लिए नोटिस भेजा जाएगा।

बोराणा ने बताया कि नाहरगढ़ में अवैध रूप से चल रही गैर वानिकी गतिविधियों को बंद कराने के लिए भी जल्द ही उप वन संरक्षक कार्यालय की ओर से प्रस्ताव बनाकर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य जीव राजस्थान को भिजवाने की कार्रवाई की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि क्लियर न्यूज डॉट लाइव ने बुधवार को नाहरगढ़ फोर्ट में चल रही गैर वानिकी गतिविधियों पर ‘मूक वन्यजीवों की जान दांव पर लगाकर हो रहा पर्यटन का विकास’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पुरातत्व और पर्यटन विभाग की ओर से अवैध तरीकों से चलाई जा रही गतिविधियों को उजागर किया था और कई दशकों से इन गतिविधियों पर मौन साधे बैठे वन विभाग के अधिकारियों पर प्रश्नचिन्ह लगाए थे।

रिजर्व फॉरेस्ट में ट्यूरिस्ट हब बनाने की साजिश

वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि पुरातत्व विभाग के पास नाहरगढ़ फोर्ट का मालिकाना हक नहीं है, इसके बावजूद वह दशकों से इस क्षेत्र को ट्यूरिस्ट हब बनाने में जुटा है। विगत पांच वर्षों में विभाग ने यहां अपनी गतिविधियां बहुत बढ़ा दी, प्राचीन निर्माण की मरम्मत के बजाए सौंदर्यीकरण के नाम पर नवीन निर्माण कराया जा रहा था, जो सीधा-सीधा वन अधिनियम का उल्लंघन है।

वन प्रेमियों, पर्यावरण विदों और वन्यजीव विशेषज्ञों की ओर से लगातार वन विभाग को इस बारे में चेताया गया था, लेकिन अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अब इन लोगों की ओर से कागजी कार्रवाई शुरू की गई और वन विभाग को घेरना शुरू किया गया है तो अधिकारियों को लगने लगा है कि वन प्रेमी इस मामले को एनजीटी तक नहीं ले जाएं। अधिकरियों को अब अपनी नौकरी पर संकट दिखाई देने लगा। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि वन विभाग नाहरगढ़ फोर्ट में अवैध गतिविधियों को बंद कराए और फोर्ट को अपने कब्जे में ले।

कांग्रेस युवा नेता व वन प्रेमी कमल तिवाड़ी ने बताया कि आज कोई गरीब आदमी वन क्षेत्र में थड़ी लगाकर आजीविका कमाने की कोशिश करता है तो अधिकारी उसे पूरे नियमों का पाठ पढ़ा देते हैं, लेकिन नाहरगढ़ में दशकों से हाई प्रोफाइल लोग नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अधिकारियों की बोलने की हिम्मत नहीं पड़ रही।

जयपुर में लगातार आबादी बढ़ती जा रही है। नाहरगढ़ और झालाणा वन क्षेत्र ने अभी तक प्रदूषण की स्थिति को संभाल रखा है, यदि यह वन क्षेत्र बर्बाद होते हैं तो जयपुर में सांस लेना दूभर हो जाएगा, ऐसे में किसी भी कीमत पर इन वन क्षेत्रों को बचाना होगा। इसके लिए हमें यदि एनजीटी तक जाना पड़ा तो हम जाएंगे, क्योंकि यह शहर के 40 लाख से अधिक लोगों से जुड़ा मामला है।

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