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किसान आंदोलन जारी, 9 दिसम्बर को होगी फिर वार्ता, कोरोना संक्रमण की आशंका में आंदोलन समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी

सरकार ने 5 दिसम्बर यानी किसान आंदोलन के 10वें दिन तीनों कृषि कानूनों में संशोधन की बात कही लेकिन किसान अब भी संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन कानूनों को रद्द किए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। आज पांचवें दौर की वार्ता एक बार फिर बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गई। अब 9 दिसंबर को सुबह 11 बजे एक बार फिर वार्ता होनी है। इससे पहले किसानों ने 8 दिसम्बर को भारत बंद आह्वान किया है।

अब भी दिल्ली पहुंच रहे किसान

इस बीच पंजाब और उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसान भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। दिल्ली में प्रवेश के टिकरी, सिंधु झारौदा सीमा पूर्ण रूप से बंद हैं, झटीकरा सीमा पर दुपहिया वाहन, बडुसराय सीमा पर दुपहिया और कार से प्रवेश की अनुमति है। धनसा, कापसहेड़ा, दौराला, रजोकरी एनएच- 8, पालम विहार, डूड़ाहेड़ा सीमा खुली हुई है।

कोरोना की जांच नहीं करा रहे किसान

टिकरी सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों में से करीब 200 किसान सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित हैं। करीब 1000 किसान कुछ ना कछ बीमारियों की दवाइयां ले रहे हैं। इन किसानों से भारतीय किसान यूनियन ने कोरोना की जांच कराने की अपील की है लेकिन वे जांच नहीं करा रहे हैं और आंदोलन करने पर अड़े हुए हैं। सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने भी अपील की है कि सर्दी का सीजन है, कोरोना के संकट के दौर में आंदोलन कर रहे किसान नेता कम से कम बुजुर्गों और बच्चों को घर भेज देंगे तो ठीक रहेगा।

कृषि मंत्री तोमर ने यह भी कहा

आज दोपहर करीब 2 बजे किसान आंदोलन कर रहे विभिन्न संगठनों के 30 प्रतिनिधि सरकार से बातचीत को विज्ञान भवन पहुंचे थे। सरकार की ओर से कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। एपीएमसी कानून राज्य के हैं और केंद्र सरकार इसमें किसी तरह का कोई परिवर्तन करने नहीं जा री है। अलबत्ता इसे मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार को जो करना आवश्यक है, उसके लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि किसानों से बातचीत करने से पहले किसानों की परेशानियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो घंटे गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल से चर्चा की।

किसानों को सीमा पर से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

पांच दिसम्बर को सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका लगाई गई जिसमें कहा गया कि दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की वजह से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है और इस परिस्थिति में इन्हें सीमाओं से हटाने के तुरंत निर्देश दिए जाएं। लेकिन, अभी तक इस याचिका पर सुनवाई का समय तय नहीं हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र व कनाडा की बेवजह की टिप्पणियां

भारत में किसान आंदोलन के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है और अधिकारियों को उन्हें यह करने देना चाहिए। उधर, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बार फिर गैरजरूरी नकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “दुनिया भर में कहीं भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हो कनाडा हमेशा उनके अधिकार के लिए उनके साथ खड़ा रहेगा और हम मामले के निराकरण की दिशा में बढ़ाए गए कदम और संवाद के प्रति आशान्वित रहेंगे।”  

यह टिप्पणी उन्होंने तब की जबकि भारत ने एक दिन पहले ही कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल को तलब कर उनसे कहा था  कि किसानों के आंदोलन के संबंध में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहां के कुछ अन्य नेताओं की टिप्पणी देश के आंतरिक मामलों में एक “अस्वीकार्य हस्तक्षेप” के समान है।

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