Madhavendra Bhawan Nahargarh scaled

नाहरगढ़ मामला एनजीटी जाने की तैयारी में

पर्यावरण

परिवादी ने पुरातत्व, वन, पर्यटन, आबकारी, खाद्य विभाग के अधिकारियों को दिया नोटिस

जयपुर। वन अधिनियम की धज्जियाँ उड़ाकर नाहरगढ़ अभ्यारण्य में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक ले जाने की तैयारियाँ हो गई है। इस मामले में अभी तक वन, पुरातत्व, पर्यटन, आबाकारी विभाग के अधिकारी मौन साधे बैठे हैं और उनसे इसका जवाब नहीं बन पा रहा है।

परिवादी राजेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि नाहरगढ़ में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों, वन भूमि पर कब्जे और अन्य मामलों को लेकर उन्होंने पुरातत्व, वन, पर्यटन, आबकारी और खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों जिनमें प्रमुख शासन सचिव वन विभाग, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक हॉफ, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, उप वन संरक्षक वन्यजीव, अधीक्षक नाहरगढ़ फोर्ट, सीईओ आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण, निदेशक पर्यटन विभाग, निदेशक पुरातत्व विभाग, जिला आबकारी अधिकारी जयपुर शहर, जिला रसद अधिकारी जयपुर, प्रबंधक पड़ाव बीयर बार आरटीडीसी और एक निजी रेस्टोरेंट के प्रबंधक को कानूनी नोटिस भेजा है।

नोटिस में कहा गया है कि संबंधित सभी लोग नाहरगढ़ अभ्यारण्य में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 व वन संरक्षण अधिनियम के तहत अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने वाले दोषी अधिकारियों व अन्य कि खिलाफा कार्रवाई कर 15 दिनों में विधिक प्रकरण दर्ज कराएं, अन्यथा वह इस मामले को एनजीटी लेकर जाएंगे।

विभागों ने साधा मौन

यह नोटिस मिलने के बाद जिम्मेदार विभागों के उच्चाधिकारियों ने मौन साध लिया है। सबसे प्रमुख वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक हॉफ से लेकर उप वन संरक्षक वन्यजीव चिड़ियाघर तक सभी अधिकारी अब इस मामले से बोलने से बचने में लगे हैं। सभी विभागों की तरफ से नोटिस के जवाब की तैयारी की जा रही है। कोशिश की जा रही है कि कैसे-जैसे इस मामले को शांत किया जाए।

इतिहास में पहुंचा पुरातत्व विभाग

नाहरगढ़ मामला उजागर होते ही पुरातत्व विभाग इतिहास में पहुंच गया है। अपनी गलती मानने और अवैध व्यावसायिक गतिविधियां रोकने के बजाए विभाग के अधिकारी तर्क दे रहे है कि यह गतिविधियां तो तीन दशकों से अधिक समय से चली आ रही है। उस समय वन विभाग ने उन्हें क्यों नहीं टोका। जबकि हकीकत है कि विगत पांच वर्षों में ही नाहरगढ़ में व्यावसायिक गतिविधियों की बाढ़ आई है, उससे पहले यहाँ कम ही पर्यटक पहुंचा करते थे।

अधिकारियों में सिर फुटौव्वल की नौबत

नाहरगढ़ मामले को लेकर पुरातत्व विभाग के अधिकारियों में सिर फुटौव्वल की नौबत आ गई है, क्योंकि वन कानूनों की धज्जियां उड़ाने में विभाग ही सबसे आगे है। अधिकारियों में इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की नौबत आ गई है और मामले को नाहरगढ़ के पुराने अधीक्षकों पर डालने की तैयारी चल रही है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *