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गुजरात में ओवैसी की बड़ी सभाएं, राजस्थान में भी हाथी और ऑटो की सवारी करने की तैयारी में पतंग!

जयपुर

जयपुर। गुजरात में होने वाले निकाय चुनावों के सिलसिले में रविवार को एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात में बड़ी सभाएं की, जिससे राजस्थान कांग्रेस को निकाय चुनावों में मिली जीत का मजा किरकिरा हो गया। कांग्रेस के बड़े नेताओं की नजर गुजरात पर बनी रही और ओवैसी की सभाओं में भारी भीड़ को देखकर कांग्रेस के तोते उड़ गए।

गुजरात निकाय चुनावों में एआईएमआईएम भारतीय ट्रायबल पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और कहा जा रहा है कि इन चुनावों में बसपा भी अंदरखाने इन दोनों पार्टियों को सपोर्ट कर रही है। ऐसे में यहां आदिवासी, अल्पसंख्यक और एससी वोटबैंक मिलकर नया गुल खिला सकता है।

सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में शपथ ग्रहण के समय ओवैसी ने जयभीम जय मीम का नारा लगाकर अपने इरादे साफ कर दिए थे कि वह उत्तर भारत में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए अल्पसंख्यक और एससी-एसटी गठजोड़ बनाने की तैयारी में है। कहा जा रहा है कि दिल्ली में ओवैसी और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच काफी बैठकें हो चुकी है, जिसका असर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत पर रहेगा। ओवैसी ने गुजरात में बीटीपी से राजनीतिक गठजोड़ कर लिया है मायावती से करीबियों के चलते उन्हें एससी वोट बैंक का भी लाभ मिल सकता है।

राजस्थान में थर्ड फ्रंट की तैयारियों के कयास
गुजरात में आवैसी की बढ़ी सक्रियता और नये बने समीकरणों ने राजस्थान में कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि नये बने इन समीकरणों के बाद राजस्थान में भी तीसरे फ्रंट के कयास लगाए जा रहे हैं। राजस्थान में तीसरा फ्रंट बनेगा या नहीं, इसका खुलासा गुजरात निकाय चुनावों के परिणामों से हो जाएगा। यदि बीटीपी एआईएमआईएम गठजोड़ गुजरात में कमाल दिखाता है तो राजस्थान में अगले विधानसभा चुनावों में तीसरा फ्रंट बनना तय माना जा रहा है।

पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान होंगे निशाने पर
यदि तीसरा फ्रंट बनता है तो इसके निशाने पर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान रहेगा। तीसरे फ्रंट में एआईएमआईएम के साथ बीटीपी और बसपा साथ आ सकती है। हनुमान बेनीवाल की आरएलपी और बड़ी पार्टियों से छिटके कुछ प्रभावशाली नेता भी इसमें शामिल हो सकते हैं और यह सब मिलकर शेखावाटी, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, टोंक, कोटा, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर आदि जिलों में अपना प्रभाव दिखा सकते हैं।

कांग्रेस ही नहीं भाजपा को भी हो सकता है नुकसान
सूत्र बताते हैं कि यदि ओवैसी अकेले राजस्थान में आते तो कांग्रेस को नुकसान होता पर थर्ड फ्रंट बना तो कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि पूर्वी राजस्थान में एससी जातियां बसपा के साथ जा सकती है। पूर्वी राजस्थान का मेवात क्षेत्र ओवैसी के साथ खड़ा हो सकता है। रही सही कसर मूल ओबीसी जातियां पूरी कर सकती है क्योंकि ये जातियां भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के चलते कांग्रेस-भाजपा से नाराज चल रही है।

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