पुरातत्व अधिकारियों की बदनीयति से बर्बाद हो रहे स्मारक

पर्यटन जयपुर

मुख्य विभाग ने अनुभव की शर्त हटाई, दूसरी ऐजेंसियां मांग रही अनुभव

जयपुर। विश्व विरासत स्थल आमेर महल में सीमेंट सरिए का उपयोग कर मरम्मत का मामला सामने आने के बाद अब पुरातत्व विभाग के अधिकारियों पर ही इल्जाम लगने लगे हैं कि वह प्रदेश की धरोहरों के संरक्षण कार्य में अपनी मनमानी कर रहे हैं। अधिकारी अपने चहेते और अनुभवहीन ठेकेदारों से गलत संरक्षण कार्य करवा रहे हैं। ऐसे में स्मारकों को नुकसान पहुंचने की संभावनाएं जताई जा रही है।

आमेर महल में सीमेंट के उपयोग का मामला खंगालने के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई है, जो अधिकारियों पर सवाल खड़े कर रही है। जानकारी के अनुसार पुरातत्व विभाग में शुरू से ही संरक्षण कार्यों के टेंडर में एक शर्त रखी जाती थी। इस शर्त के अनुसार संरक्षण कार्य उन्हीं ठेकेदारों से कराया जाता था, जिन्हें प्राचीन इमारतों में पारंपरिक निर्माण सामग्री से संरक्षण कार्य करने का पूरा अनुभव हो। ऐसे में सिर्फ अनुभवी ठेकेदार ही पुरातत्व विभाग में ठेके ले पाते थे।

पुराने ठेकेदार अधिकारियों को बता देते थे नियम

कहा जा रहा है कि विभाग में पहले पुराने ठेकेदार ही कार्य करते थे, लेकिन इन ठेकेदारों के कारण अधिकारियों की चवन्नी नहीं चल पा रही थी, क्योंकि यह ठेकेदार पुरातत्व के सभी नियम-कायदों से वाकिफ थे। ऐसे में यदि अधिकारी कुछ गड़बड़ की कोशिश करते थे तो यह ठेकेदार गलत काम करने से मना कर देते थे।

अधिकारियों ने कांटा ही निकाल फेंका

इससे परेशान होकर विभाग के उच्चाधिकारियों ने वर्ष 2017-18 में अनुभव की यह प्रमुख शर्त हटा दी। इस शर्त के हटने के बाद अनुभवहीन ठेकेदारों की विभाग में एंट्री हो गई और दूसरे विभागों से आए इंजीनियरों ने अपने पुराने विभागों से मिलीभगत वाले ठेकेदारों को पुरातत्व विभाग में बुला लिया। अब हाल यह है कि सीमेंट कंक्रीट, रोड आदि के कार्य करने वाले ठेकेदार स्मारकों पर हथौड़ा चला रहे हैं।

दूसरी एजेंसियां मांग रही अनुभव

पुरा स्मारकों का मालिकाना हक रखने वाले पुरातत्व संरक्षण के उत्तरदायी पुरातत्व विभाग ने तो संरक्षण कार्यों से अनुभव की शर्त हटा दी। पुरातत्व विभाग द्वारा शर्त हटाए जाने के बाद इसकी ठेकेदार एजेंसी आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने भी अनुभव की शर्त हटा ली और अब बिना अनुभवी ठेकेदारों से राजधानी के प्रमुख स्मारकों का संरक्षण व जीर्णोद्धार कार्य करवा रही है।

वहीं दूसरी ओर पुरातत्व संरक्षण के कार्य में लगी अन्य एजेंसियां अभी भी ठेकेदारों से अनुभव प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। हाल ही में जयपुर स्मार्ट सिटी की ओर से परकोटे के बाजारों में बरामदों की मरम्मत व कुछ मंदिरों व प्राचीन इमारतों चल रही स्कूलों का संरक्षण कार्य कराया जा रहा है। स्मार्ट सिटी की ओर से उन्हीं ठेकेदारों को संरक्षण कार्य दिया जा रहा है, जिन्हें चूने के कार्य करने का अनुभव हो। इसमें से कुछ कार्य आरटीडीसी की ओर से भी कराया जा रहा है।

आरटीडीसी की ओर से ठेकेदारों से अनुभव का प्रमाण मिलने के बाद ही काम दिया जाता है। यहां तक कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) में भी ठेकेदारो का अनुभवी होना प्रमुख शर्त रहती है। ऐसे में समझा जा सकता है कि आमेर महल जैसे विश्व विख्यात स्मारक में सीमेंट-सरिए का काम कैसे हो गया।

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