raajasthaan (Rajasthan) ke 7 medikal kolejon (medical colleges) aur sabhee jila chikitsaalayon mein ho raha hepetaitis rogiyon (hepatitis patients) kee ni:shulk jaanch va upachaar

राजस्थान (Rajasthan) के 7 मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) और सभी जिला चिकित्सालयों में हो रहा हेपेटाइटिस रोगियों (Hepatitis Patients) की नि:शुल्क जांच व उपचार

जयपुर

राजस्थान (Rajasthan) के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा है कि प्रदेश में हेपेटाइटिस नियंत्रण के लिए गंभीरता से कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) के अतिरिक्त सभी जिला चिकित्सालयों में हेपेटाइटिस रोगियों (Hepatitis Patients) की नि:शुल्क जांच व उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस से मुक्ति का लक्ष्य अर्जित करने के लिए व्यापक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

डॉ. शर्मा बुधवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय वर्चुअल सेन्सिटाइजेशन कार्यशाला को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर इस वर्ष की थीम विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित की गई है। इसके तहत हेपेटाइटिस को लेकर जानकारी और तुरंत इलाज के लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।

टेस्टिंग की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान

प्रदेश में हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत टेस्टिंग की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में हेपेटाइटिस बी एवं सी की वायरल लोड जांच भी प्रारंभ कर दी गई है। जोधपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर और झालवाड़ जिलों में भी वायरल लोड जांच प्रारंभ करने के लिए 12 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृतियां आरएमएससीएल को जारी कर दी गई हैं।

हेपेटाइटिस बी की दृष्टि से प्रमुख जोखिम वाले ग्रुप जेलबंदी, एचआइवी पॉजिटिव एवं ब्लड डोनर्स इत्यादि की हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग भी करायी जा रही है। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों के अतिरिक्त जिला अस्पतालों को भी स्क्रीनिंग किट उपलब्ध कराए गए हैं। सभी विभागों से प्रभावी समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का भी गठन किया जा रहा है।

नवजात शिशु की विशेष देखरेख

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच के दौरान ही हेपेटाइटिस बी की जांच भी आवश्यक कर दी गई है। हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव महिलाओं की पहचान कर उनकी तथा नवजात शिशु की विशेष देखरेख की जाती है एवं नवजात को हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज लगाने की भी व्यवस्था की गई है।

हेल्थ वर्कर्स को टीकाकरण की जरुरत

सेमीनार में सम्मिलित हुए आईएलबीएस के निदेशक एवं चिकित्सक डॉ एस के सरीन ने हेपेटाइटिस रोग के कारण, बचाव व इलाज के सबंध में जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस से मुक्ति के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, प्रदेश उसी के अनुसार अच्छा कार्य कर रहा है। हेपेटाइटिस के नियंत्रण के लिए जरूरी है कि हेल्थ वर्कर्स का भी पूर्ण रूप से टीकाकरण किया जाए। हेपेटाइटिस बी और इसकी जटिलता के कारण प्रतिवर्ष दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। इससे संक्रमित व्यक्ति अनजाने में दूसरों को संक्रमित कर देता है।

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