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सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल।

पराक्रमी शूरवीरों का अनगिनत अनंत पटल।

हिंदुस्तान में अक्षुणता और वैभव का यह अनूठा राज्य महान।।

सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल।

अद्भुत अकल्पनीय सदभाव है इसमें विद्यमान।

गौरवान्वित करता यह छवि हमेशा रखता राष्ट्रमान ।।

सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल।

आज़ादी के परवाने सदैव सशक्त बलवान।

खींची लक्ष्मणरेखा शौर्य और समभाव की एक समान ।।

सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल।

पृथ्वीराज सांगा कुम्भा प्रताप पद्मिनी जैसे असंख्य प्राण।

सींचती है इस धरा की आन बान और शान ।।

सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल।

आज भी इसका कण कण है कर्मठ और ऊर्जावान।

भारत की यह अभूतपूर्व धरती है सम्पूर्ण सबल महान ।।

सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल।

कथा अभी और भी आगे बढ़ानी है।

विश्व पटल पर अद्वितीय निशाँ सदैव बनानी है ।।

सदिओं से दृढ अविरल अनल अटल ।।

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