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जनता में निहित होती है संप्रभुता : डॉ. सीपी जोशी

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा है कि संप्रभुता जनता में निहित होती है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से अपेक्षा की जाती है कि वे सभी अपने संविधानिक प्रावधान के अनुरूप निर्धारित सीमा में कार्य संपादित करें। गुजरात के केवड़िया में आयोजित 80 वे अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि कानून बनाना उसे लागू करना और कानून की व्याख्या करना तीनों ही अलग-अलग तरह के कार्य है । लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की खूबसूरती इसी में है कि शासन के तीनों अंग परस्पर सामंजस्य के साथ कार्य करते हुए व्यवस्था को जनहित के अनुरूप मजबूती प्रदान करें।

तीनों अंगों की प्रतिबद्धता जनता के प्रति

डॉ जोशी ने कहा कि संविधान के तीनों अंगों की प्रतिबद्धता जनता के प्रति होनी चाहिए ना कि अन्यथा रुप से किसी विशेष लक्ष्य के प्रति। लोकतांत्रिक स्वरूप के लिए यही हितकारी है कि तीनों अंग परस्पर श्रद्धा पूर्वक एक दूसरे की स्वतंत्रता गरिमा और क्षेत्राधिकार का ध्यान रखते हुए कार्य करें।

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