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राज्य सरकार का वन्य जीवों के समुचित संरक्षण के लिए निरन्तर प्रयास का दावा और दूसरी ओर, राजधानी में उड़ रही वन एवं वन्यजीव अधिनियम की धज्जियां

अलवर पर्यावरण

जयपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) श्रुति शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार वन्यजीवों के समुचित सरंक्षण के लिए कृत संकल्पित है और वन विभाग इसके लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस दावे के बीच राजधानी में ही वन एवं वन्यजीव अधिनियमों की धज्जियां उड़ रही है। जयपुर के नाहरगढ़ अभ्यारण्य में विगत 20 वर्षों से लगातार वाणिज्यिक गतिविधियां बढ़ती जा रही है। विभिन्न विभागों की ओर से यहां लगातार वाणिज्यिक गतिविधियां बढ़ाई जा रही है और वन विभाग इन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि विभाग किस प्रकार प्रदेशभर में वन्यजीवों का संरक्षण कर रहा होगा।

शर्मा सोमवार को अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन उपस्थित उप वन संरक्षकों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी वन्य जीव जंगलों से बाहर आवासीय क्षेत्र में आ जाते हैं। ऐसी घटनाओं के वक्त वन्यजीवों और मानव के बीच संघर्ष हो सकता है। ऐसा ना हो, इसके लिए विभाग द्वारा जागरूकता के लिए समय-समय पर इस प्रकार के ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव को रोकना और उसे कम करना है।

उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग कार्यक्रमों के जरिए आमजन, विभागीय कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों को जागरूक किया जा रहा है ताकि वन्य जीवों का संरक्षण समुचित तरीके से हो सके। कई बार वन्य जीव बाड़े में घुसकर पशुओं का शिकार कर देते हैं। इस समय लोग घबराए नहीं, वन विभाग को सूचित करें ताकि वन्य जीवों को उनके नियत स्थान पर छोड़ा जा सके।

इस अवसर पर राजस्थान फॉरेस्ट्री एंड वाइल्डलाइफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक के.सी अरुण प्रसाद ने ट्रेनिंग कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए बताया कि दो चरणों में होने वाली ट्रेनिंग का पहला चरण 1 और 2 मार्च को हो रहा है। इसमें राज्य भर से 27 उप वन संरक्षक भाग ले रहे हैं। इसके बाद 7 और 8 मार्च को दूसरा चरण आयोजित कराया जाएगा। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है और इसी भावना के साथ ट्रेनिंग में शामिल उप वन संरक्षक यहां मिली उपयोगी जानकारी को अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करवाएंगे।

उल्लेखनीय है कि नाहरगढ़ में पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, आरटीडीसी की ओर से वाणिज्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ाई जा रही है। पर्यटकों को पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पुरातत्व की कार्यकारी एजेंसी एडमा ने वन भूमि पर पेड़ों की अवैध कटाई कर करीब चार से पांच बीघा क्षेत्र में अतिक्रमण कर रखा है। आबकारी विभाग ने अभ्यारण्य क्षेत्र में बार का लाइसेंस जारी कर रखा है और विद्युत विभाग ने अवैध रूप से बिजली कनेक्शन दे रखे हैं। इस मामले में परिवाद पेश होने के बाद जांच में इसका खुलासा हो चुका है, इसके बावजूद विभाग यहां कार्रवाई करने की हिम्मत तक नहीं दिखा पा रहा है।

State government's claim for continued efforts for proper conservation of wildlife and on the other hand, the nobody following the Forest and Wildlife Act 

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