Theft in Rajasthan Assembly, theft of 15 air conditioners and their pipes, breaking of artistic chandeliers in the main hall

राजस्थान विधानसभा से 29 एयर कंडीशनर हुए चोरी

जयपुर

यह एकदम पक्की खबर है कि विधानसभा में चोरी हुई है और चोर यहां से 29 एयर कंडीशनर व उनके तांबे के पाइप चुरा ले गए, लेकिन यह चोरी नई विधानसभा में नहीं हुई, बल्कि पुरानी विधानसभा में हुई है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। पता लगाया जा रहा है कि पुरानी विधानसभा से और क्या-क्या चोरी हुआ है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर की एक थाना पुलिस ने दो-तीन दिन पूर्व कुछ चोरों को तांबे के एसी के पाइपों के साथ पकड़ा था। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि यह पाइप पुरानी विधानसभा से चोरी किए गए हैं। ऐसे में यह मामला माणक चौक थाने के सुपुर्द कर दिया। बुधवार को माणकचौक थाना पुलिस मामले की जांच के लिए पुरानी विधानसभा स्थित एडमा कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों को विधानसभा में हुई चोरी का पता चला।

थाना पुलिस एडमा के अधिकारियों के साथ पुरानी विधानसभा पहुंचे तो खुलासा हुआ कि विधानसभा से तांबे के पाइप ही नहीं बल्कि भारी-भरकम 15 के करीब एयर कंडीशनर भी चोरी हुए हैं। पुलिस ने विधानसभा की पूरी जांच की और एडमा अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की।

थाना पुलिस एडमा के अधिकारियों के साथ पुरानी विधानसभा पहुंचे तो खुलासा हुआ कि विधानसभा से तांबे के पाइप ही नहीं बल्कि भारी-भरकम 15 के करीब एयर कंडीशनर भी चोरी हुए हैं। पुलिस ने विधानसभा की पूरी जांच की और एडमा अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की।

विद्युत उपकरण हो सकते हैं चोरी
सूत्र बता रहे हैं कि विधानसभा को वल्र्ड क्लास म्युजियम बनाया जाना प्रस्तावित था। इसके लिए करोड़ों का टेंडर हुआ था। ठेकेदार यहां करोड़ों रुपयों के विद्युत उपकरण लगा चुका था और चोरी गए एसी भी इसी में शामिल थे। ऐसे में कहा जा रहा है कि करोड़ों रुपयों के विद्युत उपकरण यहां से चोरी हो सकते हैं।

मैडम ने लगाई क्लास
चोरी का खुलासा होने के बाद एडमा की कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) दीप्ती कच्छवाहा ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और गार्डों को जमकर फटकार लगाई। एडमा की नाक के नीचे कुछ दिनों पूर्व नगर निगम हैरिटेज ने भी इसी भवन पर स्वच्छता सर्वेक्षण के स्लोगन पुतवा दिए थे, जिससे एडमा की जमकर छिछालेदार हुई थी और अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा था। ऐसे में अब एडमा की यह दूसरी बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है।

पुरातत्व विभाग से मामले को छिपाया
वैसे यह इमारत पुरातत्व विभाग का संरक्षित स्मारक है, जिसे म्यूजियम बनाने के लिए एडमा को हैंडओवर किया गया था। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात होने के बावजूद एडमा अधिकारियों ने दो दिनों से इस मामले को पुरातत्व अधिकारियों से छिपाया और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी। उल्लेखनीय है कि पुरातत्व विभाग पहले ही एडमा को नाकारा घोषित कर चुका है और पुरातत्व निदेशक पीसी शर्मा तो एडमा के औचित्य पर ही सवाल खड़ा कर चुके हैं।

दर्ज कराई एफआईआर
बुधवार को विधानसभा से एसी चोरी का मामला सामने आने के बाद एडमा के अधिकारियों ने अपना सारा रिकार्ड खंगाला और विधानसभा में लगे एसी से मिलान किया। इसके बाद अधिकारियों ने माणक चौक थाने में एसी चोरी की एफआईआर दर्ज कराई है। एडमा के कार्यकारी निदेशक (कार्य) सतेंद्र कुमार का कहना है कि विधानसभा से कुल 29 एसी और उनका सामान चोरी हुआ है।

मिलीभगत से चोरी की आशंका
सूत्रों का कहना है कि विधानसभा में यह चोरी एडमा में से ही किसी की मिलीभगत से हो सकती है, क्योंकि खाली पड़ी इस इमारत में शुरू से ही बंदरों का आतंक रहा है। रात क्या दिन में भी लोग बंदरों के डर से इसमें जाने से कतराते थे। अकेला आदमी इसमें नहीं जा सकता है। फिर दिन में एडमा कार्यालय में अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ 15-20 गार्ड तैनात रहते हैं। रात में भी करीब आठ से दस गार्ड यहां मौजूद रहते हैं। ऐसे में मिलीभगत से चोरी होने की आशंकाएं जताई जा रही है।

शहर की विरासत ही नहीं, संरक्षित स्मारक भी किए जा रहे बर्बाद
राजस्थान में विरासत के साथ बड़ा खेल किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि विरासतों को सहेजने की जिन विभागों पर जिम्मेदारी है, उन्हीं विभागों के अधिकारी अपने स्वर्थों के चलते विरासतों को बर्बाद करने में लगे हैं। दो दिन बाद वल्र्ड हैरिटेज डे है और उससे पहले संरक्षित स्मारक पुरानी विधानसभा के प्रति अधिकारियों की यह लापरवाही काफी परेशान करने वाली है। पुरातत्व निदेशक ने एडमा के औचित्य पर सवाल खड़ा करके सही ही किया है, क्योंकि इस दर्जे की लापरवाही माफी योग्य नहीं है। पहले अधिकारियों की आखों के आगे पेंटिंग पोत दी गई और अब यहां से चोरी का मामला साबित करता है कि अधिकारी स्मारकों की सुरक्षा के प्रति कितनी जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं। एडमा के बारे में सरकार को अब सोचना पड़ेगा कि इसे बंद करने में ही भलाई है। यदि एडमा को बंद नहीं किया गया तो शहर की विरासतों की खैर नहीं है।

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