To protect credit cooperative societies from fraud, we will also make laws if needed: Chief Minister Gehlot

क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों की धोखाधड़ी से बचाने के लिए जरूरत हुई तो कानून भी बनाएंगेः मुख्यमंत्री गहलोत

जयपुर

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के लाखों लोग क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। राज्य सरकार पक्ष व विपक्ष की राय से ऐसा कानून बना सकती है जिससे अपराधी को न केवल सजा मिले बल्कि धोखाधड़ी के शिकार व्यक्तियों को उनका पैसा भी वापस मिल सके। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा पुरजोर प्रयास किये जाएंगे।

गहलोत ने प्रश्नकाल के दौरान इस संबंध में उठाये गए मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जिन लोगों के पैसे डूबे हैं, उनमें से अधिकतर पेंशनर या ग्रामीण हैं, जो अधिक ब्याज के लालच में पैसा जमा कराते हैं। ये कंपनियां भाग जाती हैं या अपने ऑफिस बंद कर देती हैं और व्यक्ति अपने जीवन भर की कमाई गंवा देते हैं। ऐसे प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए जांच एसओजी द्वारा की जा रही है। वर्तमान में कोर्ट के फैसले के बाद ही पैसों की रिकवरी संभव हो पाती है। इस मामले में केन्द्र सरकार को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा जाएगा।

प्रारम्भ में सहकारिता राज्य मंत्री टीकाराम जूली ने विधायकों के पूरक प्रश्नों के जवाब में कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों द्वारा धोखाधड़ी के प्रकरणों पर लगाम लगाने के लिए द बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपोजिट स्कीम एक्ट-2019 बनाया गया है। इस कानून से राज्य सरकार को भी इन कंपनियों पर कार्यवाही के अधिकार मिलेंगे। राज्य सरकार द्वारा भी नियम बनाकर केन्द्र सरकार को भेजे गए है, जिससे आने वाले समय में उन पर कार्यवाही की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के अंतर्गत आने वाली ऐसी सोसायटियों के खिलाफ एसओजी में कई मामले चल रहे हैं। सेंट्रल एक्ट में 14 इस्तगासे भेजे गए हैं। राज्य सरकार द्वारा ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा जिस पर ऐसी सोसायटियों के विरूद्ध शिकायतें दर्ज कराई जा सकेगी।

इससे पहले विधायक धर्मनारायण जोशी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में जूली ने बताया कि प्रदेश में सहकारी बैंकों एवं राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 में पंजीकृत क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों एवं मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत सोसायटियों में उपभोक्ताओं की राशि वापस न मिल पाने की कुल 102096 शिकायतें/राशि 1651 करोड़ 89 लाख 61170.30 रुपए प्राप्त हुई है।

नागरिक सहकारी बैंकों की कुल 22903 शिकायतें व 104 करोड़ 61 लाख 23836.00 राशि, राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2001 में पंजीकृत सोसायटियों की 1402 शिकायतें व 144245879.00 राशि तथा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत सोसायटियों की 77791 शिकायतें व 1532 करोड़ 85 लाख 91455.30 राशि प्राप्त हुई।

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