द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में आदिवासी नेताओं की एंट्री नहीं होने भाजपा के दो दिग्गज हुए आमने—सामने, सांसद किरोड़ी लाल और राजेंद्र राठौड़ में हुई नोकझोंक

जयपुर

जयपुर। राष्ट्रपति पद की एनडीए उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू के कार्यक्रम में आदिवासी नेताओ की एंट्री नहीं होने के चलते बुधवार को भाजपा के दो दिग्गज सांसद किरोड़ीलाल मीणा और राजेंद्र राठौड़ आमने—सामने हो गए। व्यवस्थाओं को लेकर किरोड़ी लाल मीणा भड़क गए। इसके बाद हुआ यह कि मुर्मू के होटल क्लार्क आमेर पहुंचने से पहले ही डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपने समर्थकों के साथ यहां से रवाना हो गए। भाजपा विधायक और सांसदों के साथ हुई मुर्मू की बैठक में भी वे शामिल नहीं हुए।

किरोड़ी लाल मीणा प्रदेश के आदिवासी समाज से जुड़े कई लोगों को मुर्मू से मिलवाना चाहते थे। वे इन लोगों को अपने साथ लेकर होटल क्लार्क आमेर भी पहुंचे जहां एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का आदिवासी समाज के प्रबुद्ध जनों के साथ संवाद का कार्यक्रम था। हालांकि समाज से जुड़े प्रबुद्धजनों से संवाद और मुलाकात कार्यक्रम के लिए पार्टी ने पहले ही कई लोगों के नाम तय कर लिए थे, जिन्हें पास भी दे दिए गए थे, लेकिन जब किरोड़ी लाल मीणा बड़ी संख्या में समाज के अन्य लोगों को लेकर यहां पहुंचे तो पास से जुड़ी व्यवस्था में लगे भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के साथ उनकी नोकझोंक हो गई। नाराज मीणा ने इस मामले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजेंद्र राठौड़ के समक्ष भी नाराजगी जताई। बाद में नाराज होकर किरोड़ी होटल से चले गए।

बहस के दौरान राजेंद्र राठौड़ ने किरोड़ी लाल मीणा से यह कहा कि आपसे जब मैंने सूची मांगी थी कि किन के पास बनाने हैं, तो आपने क्यों नहीं दी। इतने में मीणा भड़क गए और कहा मुझसे किसी ने सूची नहीं मांगी, न मेरे पास कोई आया था। किरोड़ी लाल मीणा जोर-जोर से गुस्से में चिल्लाने लगे और यह तक कह डाला कि क्या दीवारों से पास मांगू।

इस विवाद पर मीणा ने ट्वीट कर सफाई दी कि राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू जी के अभिनंदन के लिए डूंगरपुर-बांसवाड़ा व अन्य सुदूर इलाकों से जयपुर आए आदिवासी कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं मिला तो मेरे जैसे भावुक व्यक्ति को गुस्सा आना स्वाभाविक था। मैंने अपने आदिवासी भाई-बहनों की पीड़ा को राजेंद्र राठौड़ के सामने रखा। अपनों से अपनी बात नहीं कहता तो फिर किस से कहता? कोई कितनी भी कोशिश कर ले, मेरे और मेरे भाई राजेंद्र राठौड़ के बीच कोई मतभेद नहीं है, मनभेद होने का तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता।

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