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7-साल बाद एस्टेरॉयड सैंपल लेकर लौटा नासा का कैप्सूल: 27 हजार किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से की एंट्री

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के स्पेसक्राफ्ट ने 7 साल बाद आज 24 सितंबर 2023 को एस्टेरॉयड बेन्नू से कलेक्ट किया सैंपल पृथ्वी पर पहुंचाया। सैंपल से 4.5 अरब साल पहले सूरज और ग्रह कैसे बने इसकी जानकारी मिल सकती है।
इस मिशन का नाम ओसीआईआरआईएस-आरईएक्स है, जो 8 सितंबर 2016 में लॉन्च हुआ था। मिशन की सबसे खास बात यह रही कि स्पेसक्राफ्ट ने पृथ्वी पर लैंड किए बिना सैंपल को पहुंचाया है। पृथ्वी से करीब एक लाख किमी ऊपर शाम 4.12 बजे स्पेसक्राफ्ट ने सैंपल कैप्सूल रिलीज किया। यह कैप्सूल रात 8.23 बजे यूटा रेगिस्तान में पेराशूट के जरिए उतरा।
वहीं, स्पेसक्राफ्ट ने सैंपल कैप्सूल को पृथ्वी के ऊपर रिलीज करने के 20 मिनट बाद इंजन फायर किए और ‘एपोफिस एस्टेरॉयड’ के नए सफर पर निकल गया। ये स्पेसक्राफ्ट एपोफिस एस्टेरॉयड पर साल 2029 में पहुंचेगा। मिशन का नाम भी अब ओसीआईआरआईएस-एपीईएक्स हो गया है।
27,000 किमी की रफ्तार से पृथ्वी के वातावरण में एंट्री की
27,000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से सैंपल कैप्सूल ने पृथ्वी के वातावरण में एंट्री की थी। यूटा रेगिस्ताम में कैप्सूल की रिकवरी के लिए रिकवरी टीम चार हेलीकॉप्टरों और दो बैकअप ग्राउंड व्हीकल्स के साथ लैंडिंग एरिया के पास इंतजार कर रही थी।
सीलबंद कंटेनर में ह्यूस्टन पहुंचेगा सैंपल
नासा की टीम ने 45 किलो के कैपसूल को टेफ्लॉन की कई शीटों में लपेटा। फिर हेलिकॉप्टर से लटक रही 100 फुट की केबल से इसे टेंपरेरी क्लीन रूम तक पहुंचाया। मंगलवार को सैंपल को एक सीलबंद कंटेनर में हवाई मार्ग से ह्यूस्टन भेज दिया जाएगा। नासा के अनुसार, कैप्सूल में 250 ग्राम सैंपल है। सैंपल का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा फ्यूचर रिसर्च के लिए ह्यूस्टन में नासा के जॉनसन स्पेस फ्लाइट सेंटर में संरक्षित किया जाएगा। बाकी सैंपल का 2025 तक एनालिसिस होगा।
इस मिशन से क्या हासिल होगा?
बेन्नू एस्टेरॉयड के सैंपल से वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि शुरुआती सौर मंडल कैसे बना और जीवन कैसे शुरू हुआ। यह हमें उन एस्टेरॉयड को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद कर सकता है जो भविष्य में पृथ्वी को संभावित रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

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