officer headquarters

पुराने निशान धूमिल हुए तो पुरातत्व विभाग पर लग गया नया निशान

जयपुर पर्यटन

धरोहर भले बर्बाद हो जाए, लेकिन अधिकारी मुख्यालय बदलने के पक्ष में नहीं

जयपुर। इतिहास धूमिल भले हो जाए, लेकिन वह समाप्त नहीं होता है। ऐसा ही कुछ नजर आ रहा है इतिहास से जुड़े पुरातत्व विभाग में। विभाग के मुख्यालय में पानी भरने का लंबा इतिहास है, इसके बावजूद अधिकारी अपने आराम के चलते मुख्यालय बदलने के पक्ष में नहीं है, भले ही धरोहर बर्बाद हो जाए या विभाग का रिकार्ड!

पुरातत्व निदेशक कार्यालय के नीचे पोर्च विभाग में पानी भरने के इतिहास को कह रहा है। विभाग में जब जब पानी भरा, कर्मचारियों ने पोर्च में ऑयल पेंट से पानी भरने के स्तर पर निशान लगाए थे। जानकारों का कहना है कि पोर्च में दसियों निशान लगे थे और उनके आगे पानी भरने का वर्ष अंकित था। आज भी अगर गौर से देखें तो इन निशानों की पहचान की जा सकती है। अधिकारी बरगलाने में लगे हैं कि पूर्व में कभी इतना पानी नहीं भरा, लेकिन इन निशानों पर वह बोलने से भी बच रहे हैं।

14 अगस्त को भी मुख्यालय में करीब चार फीट तक जल भराव हुआ। पानी निकलने के बाद कर्मचारियों ने अपना काम कर दिया और जहां तक पानी भरा वहां ओरेंज कलर की चौक से पोर्च में चारों ओर निशान लगा दिए, ताकि उच्चाधिकारियों को पता चल सके कि इस कार्यालय में पानी भरने की समस्या है। यह निशान केवल पानी का स्तर ही नहीं दर्शा रहे हैं, बल्कि अधिकारियों की लापरवाही, आरामतलबी, बदनियती को भी दर्शा रहे हैं।

अधिकारी कार्यालय बदलने के पक्ष में नहीं

मुख्यालय में पानी भरने के बाद पुरातत्व निदेशक ने मुख्यालय बदलने का मानस बना लिया था और पुराने पुलिस मुख्यालय में दिल्ली मेट्रो के खाली हिस्से को देख भी आए थे, लेकिन कहा जा रहा है कि अधिकाकारियों ने निदेशक कुछ भ्रम में डालकर इस मामले को लटका दिया है। मुख्यालय में जमे बैठे अधिकारी अपने आराम को लेकर कार्यालय बदलने को तैयार नहीं है।

पानी रोकने की बनाई कार्ययोजना

मुख्यालय नहीं बदलना पड़े, इसके लिए पुरातत्व विभाग, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एडमा) की इंजीनियरिंग शाखा ने नगर निगम व जेडीए से मिलकर अल्बर्ट हॉल में जल भराव रोकने के लिए नई कार्ययोजना बनाई है। इंजीनियरों का कहना है कि पानी को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। एक महीना पहले जो भारी बारिश हुई थी व प्राकृतिक प्रकोप था और प्रकृति से बड़ा कोई नहीं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि प्रकृति ने फिर से अपना प्रकोप दिखा दिया और उनके द्वारा किए जा रहे उपाय कामयाब नहीं हुए तो कौन जिम्मेदार होगा?

यह कराएंगे कार्य

-एडमा की ओर से मुख्यालय में चार से पांच मडपंप लगाए जाएंगे, ताकि कभी पानी आए तो उसे तुरंत बाहर निकाला जा सके।

-खरबूजा मंडी की ओर से आने वाली सड़क पर एक ओर नाला बना हुआ है। नगर निगम से सड़क के दूसरी ओर भी नाला बनवाया जाएगा, ताकि दो नालों के कारण सड़क पर जल जमाव नहीं हो।

-अल्बर्ट हॉल के चारों ओर रिंग के रूप में नाला बना हुआ है। रामनिवास बाग के सौंदर्यन के दौरान जेडीए ने इस नाले में पानी जाने के रास्तों को छोटा कर दिया था। अब जेडीए नाले में पानी जाने के रास्ते को बड़ा कराएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *