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एडमा का खाता सीज, काम के भुगतान के लिए अधिकारियों और संवेदकों में हो रही जूतमपैजार, सरकार के निर्देशों के बावजूद अधिकारियों ने मानवीयता की हदें लांघी

जयपुर

जयपुर। कोरोना काल में सभी से मानवीय व्यवहार के सरकार के निर्देशों के बावजूद पुरातत्व विभाग की कार्यकारी एजेंसी आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एडमा) के अधिकारियों ने मानवीयता की हदें पार कर दी है। निजी स्वार्थों के चलते एडमा के अधिकारी संवेदको को परेशान करने में लगे हैं, जिससे संवेदकों और अधिकारियों के बीच जूतमपैजार की स्थितियां आ गई है। स्थिति तो यह हो चुकी है कि एडमा के एक दर्जन के करीब संवेदकों ने एडमा में संविदा लेना बंद कर स्मार्ट सिटी का रुख कर लिया है।

एडमा सूत्रों के अनुसार पुरानी विधानसभा में इंटरनेशनल म्यूजियम बनाने के लिए संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य करने वाले संवेदक ने भुगतान नहीं होने पर न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। इसी वाद में न्यायालय ने एडमा के बैंक खाते को कुछ महीनों पूर्व सीज कर दिया था। सीज कार्रवाई होने के तुरंत बाद अधिकारियों ने दूसरे बैंक में खाता खुलवा लिया और उसी खाते से सभी वित्तीय कार्य संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन संवेदकों को महीनों से खाता सीज होने का बहाना बनाकर टरकाया जा रहा है।

संवेदकों का कहना है कि हमने एडमा में संविदा लेना छोड़ दिया है और अधिकांश संवेदक स्मार्ट सिटी में काम करने लगे है। कारण यह कि खाता सीज होने का बहाना कर अधिकारी संवेदकों से भुगतान के बदले गैर वाजिब मांग कर रहे हैं, जो संवेदकों को मंजूर नहीं है और इसी को लेकर आए दिन संवेदकों और अधिकारियों में बहस होती रहती है। जब एडमा के सभी वित्तीय कार्य हो रहे हैं, एडमा अधिकारी अपना और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन भुगतान कर रहे हैं, स्मारकों पर मेंटिनेंस कार्य कराया जा रहा है और हमारे भुगतान के लिए खाता सीज होने का बहाना बनाया जा रहा है।

शासन सचिव ने फटकार लगाई तो एडमा छोड़ भागा इंजीनियर
एडमा में संवेदकों को परेशान करने का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि आरटीडीसी से डेप्युटेशन पर एडमा आए इंजीनियर ने एक संवेदक का भुगतान गलत तरीकों से दो वर्षों से रोक रखा था। दो साल बाद उसने भुगतान की फाइल चलाई। सूत्रों का कहना है कि जब यह भुगतान की फाइल एडमा की सीईओ और पुरातत्व एवं कला संस्कृति विभाग की शासन सचिव मुग्धा सिन्हा के पास पहुंची तो उन्होंने इस इंजीनियर को तलब कर लिया और जमकर फटकार लगाई कि दो वर्ष से इस संवेदक का भुगतान क्यों नहीं हुआ। फटकार के बाद इस इंजीनियर ने एडमा से भागने में ही भलाई समझी और वापस अपने मूल स्थान पर पहुंच गया। इसी इंजीनियर की एक ओर शिकायत भी शासन सचिव के पास पेंडिंग पड़ी है, जिसमें एक अन्य संवेदक को परेशान किया जा रहा था।

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