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किसानों के नाम पर राजनीति चमकाने की तैयारी, बेनीवाल-पायलट आ सकते हैं साथ

जयपुर

जयपुर। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के बहाने राजस्थान में राजनीति चमकाने की तैयारी चल रही है। कहा जा रहा है कि किसानों के नाम पर नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल और कांग्रेस विधायक सचिन पायलट साथ आ सकते हैं। राजस्थान में शुक्रवार को हुआ घटनाक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और इसी को लेकर ही यह कयास लगाए जा रहे हैं।

आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल के आह्वान पर प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर ट्रेक्टर रैलियां निकाली गई। वहीं दूसरी ओर पायलट की ओर से भी अपने पिता, माता और स्वयं के निर्वाचन क्षेत्र दौसा में महापंचायत का आयोजन किया गया। एक ही दिन आयोजित इन दोनों कार्यक्रमों पर भाजपा-कांग्रेस की नजर जमी रही और कयास शुरू हो गए कि पायलट और बेनीवाल के बीच कुछ चल तो नहीं रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि पायलट को अब कांग्रेस में अपना कोई राजनीतिक भविष्य नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि एक तरफ तो वह बगावत की कोशिश करके मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निशाने पर आ गए हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष बदलने के प्रकरण में भी वह दिल्ली में एक्सपोज हो चुके हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि पायलट कांग्रेस में काफी तिलमिला रहे हैं, क्योंकि उनके भारी दबाव के बावजूद न तो मंत्रिमंडल विस्तार हो पा रहा है और न ही राजनीतिक नियुक्तियां, ऊपर से उनके गुट को तोडऩे की लगातार कोशिशें हो रही है। ऐसे में कहा जा रहा है कि पायलट प्रदेश में जगह-जगह दौरे, रैलियां और सभाएं कर अपना जनाधार मजबूत करने में लगे हैं ताकि चुनावों के पूर्व सही मौका देखकर कांग्रेस को अलविदा कर सकें। कांग्रेस में रहकर बनाया गया जनाधार ही उनके आगे के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा।

उधर हनुमान बेनीवाल भी किसानों की राजनीति करने के चक्कर में केंद्र सरकार से विरोध मोल ले चुके हैं। किसानों के समर्थन के चलते वह एनडीए से भी अलग हो चुके हैं। ऐसे में बेनीवाल को लग रहा है कि अगले चुनावों में उन्हें भाजपा का साथ तो मिलने से रहा। भाजपा के सहयोग के कारण ही वह सांसद का चुनाव जीत पाए थे। ऐसे में वह प्रदेश में नए समीकरण तलाशने में लगे हैं और उन्हें पायलट में उम्मीद की किरण नजर आ रही है।

सूत्रों का कहना है कि बेनीवाल और पायलट में लंबे समय से जुगलबंदी चल रही है। जयपुर में हनुमान बेनीवाल कई बार पायलट के घर जा चुके हैं। वहीं दिल्ली में भी उनकी मुलाकातें होने की चर्चाएं है। राजस्थान में सियासी संकट के समय भी बेनीवाल ने कहा था कि यदि पायलट और उनके साथी आरएलपी में आते हैं तो उनका स्वागत है। बाड़मेर में बेनीवाल पर हुए हमले की पायलट ने निंदा की थी। शाहजहांपुरा बार्डर पर बेनीवाल के साथ पूर्व विधायक रामस्वरूप कसाणा भी जमे हुए हैं। यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कसाणा किसके इशारे पर बेनीवाल को समर्थन दे रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि बेनीवाल अभी तक जाट राजनीति करते आए हैं और इसमें वही सफल होता है जो अशोक गहलोत से टक्कर लेता है। वहीं पायलट ने भी गहलोत के खिलाफ झंडा बुलंद किया था। प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अब यह दोनों बसपा प्रमुख मायावती की ओर देख रहे हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि गहलोत के तीनों विरोधी अगले चुनाव में गठजोड कर एक साथ आ सकते हैं।

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