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भाजपा की गुटबाजी चरम पर!

राजनीति जयपुर

डूंगरपुर से राजे खेमे के विधायक हुए गायब

जयपुर। कांग्रेस में गुटबाजी को हवा देकर सरकार गिराने के लिए चालें चल रही भाजपा भी अब गुटबाजी का शिकार होती नजर आ रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा में अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्र समर्थित गुट में ज्यादा से ज्यादा विधायक अपने खेमे में लाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। इसमें सबसे ज्यादा नजर पहली बार विधायक बने या फिर कांग्रेस से भाजपा में आकर चुनाव लड़े विधायकों पर है।

सूत्रों का कहना है कि इसका आभास डूंगरपुर की घटना से हो रहा है। डूंगरपुर से चार विधायकों को गुजरात पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। यह चारों विधायक साबला से एक कार में रवाना हुए, लेकिन आसपुर के पास धारियावाद विधायक गौतम लाल मीणा अलग हो गए और जरूरी काम से घर जाकर वापस आने की बात कही। इसके बाद तीन विधायक गोपीचंद मीणा, हरेंद्र निनामा और कैलाश मीणा गुजरात के लिए रवाना हो गए। बताया यह जा रहा है कि गौतम लाल राजे गुट के करीबी हैं। दूसरी ओर झालवाड़ के तीन विधायकों के पास गुजरात जाने के लिए फोन नहीं गया। बताया जा रहा है कि यह तीनों विधायक भी राजे गुट के हैं।

इसी दौरान अजमेर संभाग के विधायकों को भी जयपुर बुला लिया गया और उन्हें चार्टर्ड विमान से गुजरात भेजा गया। इन विधायकों में जहाजपुरा के गोपीचंद मीणा, आसींद के झब्बर सिंह सांखला, मांडलगढ़ के गोपाल लाल जोशी, गुरदीप शाहपिणी और धर्मेंद्र मोची थे। इन्हें विधायक अशोक लाहोटी और निर्मल कुमावत के नेतृत्व में गुजरात के पोरबंदर भेजा गया।

इन विधायकों में गुरदीप शाहपिणी ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से भी टिकट मांगा था, लेकिन भाजपा ने इनको पहले टिकट दे दिया था। वहीं गोपाल लाल जोशी कांग्रेस प्रष्टभूमि के हैं और इस बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए हैं। इन दोनों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इनके रवाना होने से पूर्व विधायक लाहोटी ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की ओर से इन विधायकों को परेशान किया जा रहा था। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही भाजपा ने अपने 12 विधायकों को गुजरात शिफ्ट किया है।

विधायकों की गुजरात शिफ्टिंग पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि कई बार ऐसी परिस्थितियां हो जाती है कि विधायकों को शिफ्ट करना पड़ता है। यह गैर कानूनी तो नहीं है। हमें इनपुट मिला था कि सरकार हमारे कुछ लोगों को स्थानीय लोगों को या पुलिस के सहयोग से दबाने की कोशिश कर रही है। पिछले दिनों विधायकों से बात की तो यह बात सामने आई। विधायकों ने कहा कि वह पांच-सात दिन घूमने जाना चाहते हैं, जिसकी इजाजत दे दी गई है। आवश्यकता होगी तो उन्हें जयपुर बुलाया जाएगा। इसकी कांग्रेस की बाडाबंदी से तुलना नहीं की जानी चाहिए।

पदार्पण के साथ शुरू हुई अदावत

राजनीति के जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे के राजस्थान की राजनीति में पदार्पण के साथ ही भाजपा में यह गुटबाजी शुरू हो गई थी, जो अब चरम पर है। राजस्थान मे आते ही राजे ने संगठन पर पकड़ बनानी शुरू की तो संघ खेमा राजे का विरोधी हो गया। उनके सबसे बड़े विरोधियों में पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत और ललित किशोर चतुर्वेदी थे। तब से लेकर आज तक दोनों खेमों में यह अदावत चलती आ रही है। वर्तमान में दोनों गुट आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

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