Congress 'I' on economic issues leaving tilak

छाप-तिलक (tilak) छोड़ कर कांग्रेस (Congress) ‘आई’ आर्थिक मुद्दों (economic issues) पर

जयपुर

केंद्र में भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए अपनाई अपनी पुरानी और चिर-परिचित रणनीति

दिल्ली में अनुमति नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री गहलोत ने लपकी रैली, पंजाब के मुख्यमंत्री रह गए फिसड्डी

जयपुर। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने माथे पर तिलक लगाकर और जनेऊ पहनकर कांग्रेस (Congress) को फिर से सत्ता में लाने की भरसक कोशिशें की, इसके लिए उन्होंने अपनी जाति और गोत्र तक बता दिया, लेकिन वह भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाने में कामयाब नहीं रहे। इसके बाद बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने राजनीति में एंट्री मारी और उन्होंने भी छाप-तिलक(tilak) को राजनीति में एंट्री का शॉर्टकट समझ लिया।

प्रियंका भी मंदिरों को धोकने लगीं। तिलक की जगह पूरे ललाट पर चंदन लगाने लगीं, हाथ में कलावा बांधने लगी लेकिन शायद विधानसभा चुनावों के पहले ही उन्हें समझ में आ गया कि अब इन हथकंडों से कुछ नहीं होने वाला है। ऐसे में यूपी को छोड़कर तीन दिनों के लिए राजस्थान घूमने आ गई और फिर वहां से वापस यूपी जाने के बजाए दिल्ली पहुंच गई।

‘भूखे पेट भजन न होय गोपाला ‘

कांग्रेस को अब पता चल गया है, कि छाप-तिलक के भरोसे कांग्रेस भाजपा के बढ़ते वोटबैंक में सेंध नहीं लगाई जा सकती है। ऐसे में कांग्रेस भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए रणनीति बदलने में लगी है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस फिर से अपनी पुरानी और जांची-परखी रणनीति की ओर चल पड़ी है, जिसके तहत अब शायद भाजपा को आर्थिक मुद्दों (economic issues) पर ही घेरा जाएगा। काफी समय से कांग्रेस ने देशभर में पेट्रोल के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। अब कांग्रेस ने महंगाई के मुद्दे पर केंद्र को घेरना शुरू कर दिया है। इसी के तहत ‘महंगाई हटाओ रैली ‘ के जरिए भाजपा पर दबाव बनाने की चाल चली है, ताकि आगामी विधानसभा चुनावों और उसके बाद लोकसभा चुनावों में लाभ लिया जा सके।

गरीबी हटाओ और आलू प्यास से हुई सत्ता में वापसी
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि प्रख्यात समाजवादी विचारक, काशी विश्वविद्यालय के चांसलर और स्वतंत्रता सेनानी आचार्य नरेंद्र देव के पत्रों और लेखों की 1952 में प्रकाशित पुस्तक में उन्होंने बहुत पहले ही बता दिया था कि यदि कांग्रेस को सत्ता में बने रहना है तो उन्हें आर्थिक मामलों पर मुखर रहना होगा। कांग्रेस आजादी के बाद से अब तक तीन बार सत्ता से बाहर हुई है। पहले इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हुई। उसके बाद पीवी नरसिम्हाराव के बाद कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। वर्तमान में कांग्रेस 2014 से सत्ता से बाहर बैठी है। इंदिरा गांधी का सत्ता में वापसी का रास्ता ‘गरीबी हटाओ’ के नारे से खुल पाया था। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद कांग्रेस की वापसी आलू और प्याज के भावों के कारण हुई थी। यह दोनों आर्थिक मामले थे, जिनको लेकर कांग्रेस सड़कों पर आई थी। अब फिर से सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस आर्थिक मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरी है। अब देखने वाली बात यह रहेगी कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के राष्ट्रवाद के मुद्दे को जीत मिलती है या कांग्रेस के आर्थिक मुद्दों को।

गहलोत फिर दिखा गए जादूगरी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है। वह किसी भी राजनीतिक फायदे को लपकने से कभी नहीं चूकते हैं। महंगाई हटाओ रैली को लपक कर गहलोत ने फिर अपनी जादूगरी दिखाई है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कुछ समय बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यदि महंगाई हटाओ रैली पंजाब में आयोजित होती तो वहां के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सरकार बनाने में बड़ी मदद मिलती, लेकिन चन्नी चेतते उससे पहले ही गहलोत इस रैली को राजस्थान खींचने में कामयाब हो गए। इस रैली से गहलोत गुटबाजी में उलझे कार्यकर्ताओं और संगठन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश करेंगे, जिसका फायदा कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों में मिलेगा। रैली को सफल बनाकर गहलोत एक बार फिर अपनी कामयाबी के झंड़े गाड़ेंगे।

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