दीपोत्सवः मुहूर्त और पूजन की विधि

धर्म
अरुण कुमार, एस्ट्रोलॉजर

भारतीय संस्कृति में सबसे अधिक लोकप्रिय और महत्वपूर्ण पर्व यदि कोई है तो दीपावली ही है। यह त्योहार असत्य पर सत्य की जीत, जीवन में अंधकार को दूर कर प्रकाश लाने और अपने पितरों को याद करने के अवसर के तौर पर मनाते हैं। कार्तिक अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्योहार धनतेरस से भाई दूज यानी पांच दिन तक मनाया जाता है। देश में यह त्योहार अलग-अलग भागों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है परंतु सभी के भाव में जीवन के लिए सुख, शांति और समृद्धि की  कामना ही रहती है। इस साल के पांच दिवसीय दीपोत्सव के मुहूर्त इस प्रकार रहने वाले हैं।

पहला त्योहार धनतेरस 13 नवंबर 2020

यह अवसर घर में नया सामान जैसे आभूषण, वस्त्र, वाहन, बर्तन, जमीन-जायदाद, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि को खरीदने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन विभिन्न प्रकार की खरीद के लिए मुहूर्त प्रातः 6.59 से 11.01 बजे तक, दोपहर 12.01से 12.49 अभिजित मुहूर्त, सायं 4.28 से 5.50 तक और प्रदोषकाल 5.45 से 8.24 बजे तक हैं।

इस बार ऐसे करें पूजन: धनतेरस का त्योहार धन और आरोग्य से जुड़ा हुआ है। इस दिन धन के लिए धन के देवता कुबेर की आरोग्य के लिए धनवन्तरी की पूजा की जाती है। सुबह भगवान धन्वंतरि के चित्र को चौकी पर रख कर पंचोपचार पूजन करें। इसी तरह भगवान कुबेर के प्रतीक के रूप में कुबेर यंत्र (किसी भी धार्मिक सामग्री का विक्रय करने वालों की दुकान पर मिल जाएगा) को भी चौकी पर रखकर पंचोपचार कर पूजन करना चाहिए। दोपहर पश्चात बर्तन खरीदें।  संध्या समय घर के बाहर दोनों तरफ तिल्ली के तेल का दीया अनाज पर रखकर प्रज्ज्वलित करें और ध्यान रखें कि  दीपक प्रज्ज्वलन के समय मुख दक्षिण दिशा की तरफ रखें।

पहला और दूसरा त्योहार रूप चतुर्दशी एक ही दिन

संवत् 2077 में धनतेरस और रूप चतुर्दशी एक ही दिन 13 नवंबर 2020 को मनाये जाएंगे। दिवोदास ग्रन्थानुसार यदि तिथि खंडित हो गई है तो पहले दिन प्रदोष काल में दीप दान ( धनतेरस और रुप चतुर्दशी के निमित्त) करके अगले दिन स्नान करना चाहिए। छोटी दीपावली या नरक चतुर्दशी उन लोगों को भी मनानी चाहिए जिन परिवार में किसी की मौत आदि के कारण नहीं मनाये जाती हो। सूर्योदय से पहले उठ कर तिल्ली के तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए। संध्या समय सरसों अथवा तिल्ली के तेल का चतुर्मुखी दीपक जलायें। मुख्य द्धार के दोनों तरफ दीपक जलाएं और धर्मराज व पितरों का ध्यान करें।

तीसरा त्योहार दीपावली, शनिवार 14 नवंबर

हिन्दू समाज के सबसे बड़े त्योहार दीपावली के दिन मां लक्ष्मी और पिता शिव और मां-पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेशस जी का पूजन किया जाता है। इस दिन पृजन के लिए मुहूर्त सायं 5.32 से 8.12 तक प्रदोषकाल है। यह समय पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। सायं 5.49 से 6.02 तक स्थिर लग्न, स्थिर नवमांश कुंभ तथा प्रदोषकाल है। यह समय बहुत शुभ है। सिंह लग्न में पूजन का समय मध्यरात्रि 12.07 से 2.23 तक है। प्रदोषकाल में मनुष्यों को दीपक हाथ में लेकर अपने पितरों को मार्ग दिखाना चाहिए तथा उनका पूजन करना चाहिए।

इस बार ऐसे करें पूजनः – दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के साथ, प्रथन पूज्य गणेश जी, समस्त कलाओं की देवी सरस्वती, धन-धान्य और समद्धि के देवता कुबेर के अलावा देवताओं के राजा इन्द्र और बही खाता पूजन भी किये जाते है। लक्ष्मी पूजन के लिए रोली, मोली, चावल, इलायची,पान, सुपारी, कपूर, गुड़, पुष्प, जौ, गेहू, चंदन, नारियल, खील, बताशे, सिन्दूर, ऋतु फल, मिठाई, पंचरत्न, पंचामृत, लक्ष्मी जी का पाना, सफेद, लाल, कलश, घी, कमल पुष्प, कमल गट्टा, जलपात्र, चांदी के सिक्के, इत्र, रुई आदि सामग्री लें। लक्ष्मी पूजन के समय हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। पीला वस्त्र अति शुभ है अतः इसे धारण करना श्रेयस्कर है। लक्ष्मी पूजन से पूर्व सर्वप्रथम गणेश जी का पंचोपचार पूजन करें। तत्पश्चात लक्ष्मी जी का पंचोपचार पूजन करें। पूजन के पश्चात श्रीसूक्त, गोपाल सहस्रनाम का जाप करें। मंत्र इस प्रकार है –

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

इस मंत्र की कम से कम एक माला जरूर करें। लक्ष्मी पूजन के समय अन्य मिठाई हो या न हो किंतु एक कटोरी में अपने पितरों को याद करते हुए खीर का भोग अवश्य लगाने का प्रयास करना चाहिए।

चौथा त्योहार गोवर्धन पूजा, रविवार 15 नवंबर

गोवर्धन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रविवार सुबह 8.09 से 12.11 तक, सायं 5.35 से 8.53 तक है। कृष्णावतार से पहले भगवान इंद्र की पूजा इस दिन की जाती थी। कालांतर में भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा बंद करवा कर गोवर्धन की पूजा शुरू की। इस दिन गोबर से घर के आंगन में गोवर्धन पर्वत की रचना करके पंचोपचार पूजन करें। मिठाई,फल,अनाज, आदि का भोग लगाएं। इस दिन को गौ दिवस भी मनाया जाता है इसलिए गाय की पूजन करें तथा हरा चारा, रोटी, मिठाई आदि खिलाएं।

गोवर्धन धराधार गोकुलत्राणकारक

बहुबाहुकृतच्छाय गवां कोटिप्रदोभाव

घर में बने गोवर्धन की परिक्रमा के समय ऊपर लिखे मंत्र के साथ प्रार्थना करें।

पांचवा त्योहार भाईदूज

इस दिन बहिनें अपने भाइयों को घर बुलाकर टीका लगाती हैं। यदि बहिनों के घर भाई किसी कारण से नहीं जा पाते हैं तो बहिनें भी टीका लगाने के लिए भाइयों के यहां जाती हैं। टीका करने और भाइयों को मिठाई खिलाने के लिहाज से शुभ मुहूर्त सुबह 9.30 से 10.51 तक और दोपहर 1.32 से शाम 5.34 तक है भाई दूज को यम द्वितिया भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन यम की बहन ने अपने भाई यम को अपने घर पर भोजन के लिए निमंत्रण दिया था। उस निमंत्रण को पाकर यम बहुत स्नेह से भाव-विव्हल हो गये और बहिन के घर गये। उनकी बहिन यमी ने उन्हें बहुत स्वादिष्ट भोजन कराया। यम ने भी अपनी बहन को अनेक भेंट दीं। यमी ने अपने भाई यम से इस दिन यह वर मांगा कि जो बहिन इस दिन अपने भाई को भोजन कराये तथा टीका करे, उनकी रक्षा होनी ही चाहिये। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि इस दिन बहिन अपने भाई को भोजन करा कर ताम्बूल जरूर खिलाए तो इससे उसका सौभाग्य अखण्डित रहता है।

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