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चुनावों का मौसम और सीएए का जिन्न बोतल से बाहर

जयपुर

जयपुर। चुनावों का मौसम है। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में विधानसभा के और राजस्थान के तीन शहरों में नगर निगमों के चुनावों की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर बयान क्या दिया, उन्हें जवाब देने वालों की होड़ सी लग गई है। पहले तृण मूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इस वाक् युद्ध में कूद पड़े हैं।

क्या कहा है गहलोत ने

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा जी का नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करने को लेकर स्टेटमेंट बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कोरोना से पहले भी सीएए लागू करने को लेकर बीजेपी की हठधर्मिता के कारण मुल्क  में बेहद तनाव बना हुआ था और कई हिस्सों में आग लगी हुई थी और अब जबकि देश कोरोना महामारी की गंभीर चुनौती से जूझ रहा है, बीजेपी इस तरह के बयानों  से उस तनाव को पुनः भड़काना चाहती है। शांति और सद्भाव को बिगाड़ने के बजाय प्राथमिकता देश के समक्ष मौजूदा कोरोना संकट का एकजुटता से मुकाबला करते हुए जीवन बचाने की होनी चाहिए।“

नड्डा और महुआ ने क्या कहा

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में भाजपा की एक बैठक के दौरान कहा था, “कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के कारण सीएए को लागू करने में देरी हुई लेकिन अब जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।“ इसके बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर नड्डा को जवाब दे डाला, “जेपी नड्डा कह रहे है हैं कि सीएए को जल्दी ही लागू किया जाएगा। बीजेपी सुन ले, हम आपको कागज दिखाने से पहले ही दरवाजा दिखा देंगे।“

क्या है सीएए में

उल्लेखनीय है कि पिछले साल केंद्र सरकार की ओर से संशोधित नागरिकता कानून लाया गया था, जिसके तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा सकेगी। इसके बाद देश भर में इस कानून के विरोध में कई प्रदर्शन हुए और दिल्ली में तो शाहीन बाग इलाके में लंबे समय तक आमजन का रास्ता रोककर धरना दिया गया था।

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