full-transparency ke sath hui oxygen concentrators ki kharid: Medical Secretary

पूर्ण पारदर्शिता (full transparency)के साथ हुई ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर्स (oxygen concentrators) की खरीद: चिकित्सा सचिव

जयपुर स्वास्थ्य

जयपुर। प्रदेश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसके प्रबंधन को लेकर बेहतरीन कार्य किया गया। भामाशाहों ने भी ऑक्सीजन की उपलब्धता में अहम योगदान दिया। चिकित्सा सचिव सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन सर्विसेज लिमिटेड (RMSCL)के माध्यम से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स (oxygen concentrators) की खरीद पूर्ण पारदर्शिता (full transparency) से की गई है। एक समाचार पत्र द्वारा दिनाँक 3 जुलाई को खबर छापकर 5 एलपीएम ऑक्सीजन कन्सनट्रेटर की तुलना 10 एलपीएम वाले ऑक्सीजन कन्सनट्रेटर से कर भम्र फैलाने का प्रयास किया गया।

स्थानीय विधायक क्षेत्रीय विकास निधि के जरिए खरीद सीएमएचओ के स्तर से की गई ना कि आरएमएससीएल के स्तर से। अजमेर में 10 एलपीएम वाले 100 कन्सन्ट्रेटर नेगोशिएशन के बाद 83 हजार एवं जीएसटी के साथ, बारां में 5 एलपीएम के कन्सन्ट्रेटर 58 हजार व जीएसएटी के साथ खरीदा गया। वहीं 5 एलपीएम क्षमता के कन्सन्ट्रेटर 80 हजार 325 रुपए व जीएसटी के साथ क्रय किए गए।

कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन की अनुपलब्धता के चलते वैश्विक निविदाएं भी आमंत्रित की गई थी। इसमें 5 एलपीएम वाले ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर की दर जीएसटी के साथ 1 लाख 10 हजार रुपए व 10 एलपीएम वाले कन्सन्ट्रेटर की दर जीएसटी के साथ 1 लाख 55 हजार रुपए प्राप्त हुई। नेगोशिएशन के बाद यह दर 5 एलपीएम वाले कन्सन्ट्रेटर के लिए जीएसटी के साथ 51 हजार 700 रुपए व 10 एलपीएम वाले कन्सन्ट्रेटर के लिए 79 हजार 95 से लेकर 85 हजार अनुमोदित की गई

भ्रामक समाचारों से भामाशाह परम्परा को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास

एक समाचार पत्र में बांदीकुई कोविड सेंटर की प्रदर्शित फोटो में दिखाए गये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर दानदाता द्वारा उपलब्ध करवाये गये हैं। उन्होंने कहा कि दानदाताओं द्वारा कोविड-19 के इस भीषण दौर में की गई इस जीवन रक्षक मदद के बारे में प्रकाशित गलत व भ्रामक समाचारों से राजस्थान की गौरवशाली ‘भामाशाह परम्परा‘ को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि समाचार पत्र में तथाकथित रूप से खराब ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पर न केवल मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है बल्कि इनके उपयोग से बड़ी संख्या में मरीजों की जान भी बची है। ऎसे मरीजों के वक्तव्य भी उपलब्ध है।

वैरिफिकेशन और तकनीकी समिति द्वारा जांच के बाद ही जिलों में भिजवाए

चिकित्सा सचिव ने बताया कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन द्वारा उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मानक प्रमाण-पत्र-यूएसएफडीए सर्टिफाइड/सीई सर्टिफिकेट फ्रोम नोटिफाइड बॉडी धारक प्रस्तावकों के ही प्रस्तावों पर विचार किया गया तथा सर्टिफिकिट्स ऑनलाइन वैरिफिकेशन किये जाने तथा दरों में नेगोशिएशन किये जाने के उपरांत ही 30 हजार 700 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के क्रयादेश जारी किये गये हैं। आपूर्ति प्राप्त किए गए उपकरणों की तकनीकी समिति द्वारा जांच किये जाने के उपरांत ही जिलों को भिजवाये गये है।

उन्होंने कहा कि आरएमएससीएल द्वारा नॉन कोविड समय में भी आमंत्रित किये जाने वाली निविदाओं में इंपोट्र्स को सदैव ही अनुमत किया जाता है। इसी क्रम में निगम द्वारा जारी वैश्विक ईओआई में भी आयातक को अनुमत किया गया है तथा इंपोट्र्स से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स खरीदे गये हैं। गौरतलब है कि न केवल भारत सरकार द्वारा 245 चीन निर्मित ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स प्रदेश को कोविड प्रबन्धन के लिए उपलब्ध कराये हैं। विभिन्न भारतीय फमोर्ं द्वारा 60 हजार से अधिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स के क्रय आदेश चीनी कम्पनियों को दिये गए हैं।

कोविड-19 के इस भीषण दौर में मांग व आपूर्ति में भारी अन्तर के समय इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। इन्हीं प्रयासों के कारण केवल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स के माध्यम से 300 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की उत्पादन क्षमता हासिल की गई। इस कारण राज्य की तरल मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भरता को काफी हद तक सीमित किया गया है।

सरकार दे रही है स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता

कोविड-19 के प्रथम दौर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तंत्र के आधारभूत ढांचें को सुदृढ़ करने के लिए 1000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय की गई है तथा कोविड-19 के द्वितीय दौर में 2000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तंत्र को आधारभूत ढांचे (ऑक्सीजन जनरेशन प्लान्ट, ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर, लिक्विड ऑक्सीजन टेंक, ऑक्सीजन सिलेण्डर, केन्द्रीयकृत गैस पाइप लाइन, नवीन आईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, ऑक्सीजन बैड, सीआर सिस्टम, सीटी स्केन, जीवन रक्षक दवाइयों की खरीद, विभिन्न जांच उपकरणों की खरीद, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण आदि) को मजबूती देने के लिए प्रावधित की गई है।

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