Gehlot again targeted Yogi over Lakhimpur, said it has become a tradition to stop opposition parties in UP

लखीमपुर (Lakhimpur) को लेकर गहलोत (Gehlot) ने फिर योगी (CM Yogi) पर साधा निशाना, कहा उत्तर प्रदेश (UP) में विपक्षी पार्टियों को रोकना बना परंपरा (Tradition)

जयपुर ताज़ा समाचार
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Gehlot) ने उत्तर प्रदेश (UP) के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur) की घटना को लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। गहलोत ने कहा कि यूपी के सीएम को चाहिए था कि वे विपक्षी पार्टियों के लोगों के जाने के लिए सुरक्षा की व्यवस्था करते। यूपी ऐसा प्रदेश बन गया, जहां विपक्षी पार्टियों को रोकना परंपरा (Tradition) बन गई है।

गहलोत ने कहा कि सरकार की जैसी मंशा होती है, पुलिस वैसा ही बर्ताव करती है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर न्याय दिलाना चाहिए। जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है, उम्मीद है यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट और देशवासियों की भावनाओं के अनुसार कदम उठाएगी।

गहलोत ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा की स्पीच को सबने सुना था। इसमें जनता को खुलेआम कह रहे थे कि मंत्री बनने से पहले मैं क्या था? ऐसी स्थिति पैदा कर दूंगा कि सब भाग जाओगे। जो जनता को इस तरह की धमकी दे रहा है, उसके बाद जो कुछ हुआ वह सबके सामने है। चार किसानों का मरना किसे कहते हैं? आठ लोग मारे गए। दिल दहलाने वाला सीन बना है। इसके बावजूद न अजय मिश्रा ने इस्तीफा दिया न प्रधानमंत्री ने उनसे इस्तीफा लिया। उनके बेटे पर किसानों को कुचलकर मारने का आरोप है।

गहलोत ने कहा कि किस दिशा में देश को ले जा रहे हैं। आपके सामने पू्रफ आ गए। भाषण में जो आदमी खुलेआम धमकी दे रहा है, इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लखीमपुर खीरी की घटना के बाद कांग्रेस की प्रभारी महामंत्री के तौर पर प्रियंका गांधी जाना चाहती थीं। राहुल गांधी, भूपेश बघेल, दीपेंद्र हुडा सहित कई और नेता वहां गए। उन्हें रोकने की कोशिश करने का तुक समझ नहीं आता। ऐसी घटनाओं में विपक्षी पार्टियां नहीं जाएंगी, तो कौन जाएगा?

अगर विपक्षी पार्टियां ऐसी घटनाओं के समय जाकर जनता की बात सुनती है, तो लोगों के बीच यह भावना जाती है कि विपक्ष उनके साथ खड़ा है। इससे लोगों में विश्वास पैदा होता है कि उनके साथ न्याय होगा। इस विश्वास से लोग शांत रहते हैं। कानून हाथ में नहीं लेते।

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