गुर्जरों ने सरकार को दिया 1 नवंबर तक का समय, मांगे नहीं मानी तो होगा चक्का जाम

भरतपुर

भरतपुर। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने ढाई साल बाद आज 17 अक्टूबर को अड्डा गांव में महापंचायत बुलाई। इस बीच सरकार की ओर से भेजे गए विशेष दूत भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी (आईएएस) नीरज के. पवन ने संघर्ष समिति के संयोजक किरोड़ी बैंसला सहित विभिन्न नेताओं से वार्ता की। आखिरकार गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से किरोड़ी बैंसला ने सरकार को गुर्जरों की मांगे मानने के लिए 1 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा इसके बाद रेल और सड़कों पर चक्का जाम किया जाएगा।

आईएएस नीरज के. पवन ने किया वार्ता के प्रयास

अड्डा गांव में आज गुर्जरों की महापंचायत होने की संभावना को देखते हुए सरकार ने भरतपुर क्षेत्र के बयाना, बैर, भुसावर, रूपवास सहित कई जगहों पर 16 अक्टूबर को रात से ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी।  सुरक्षा के लिहाज से 2350 जवानों की तैनाती की गई थी। इसके बाद सरकार और गुर्जर समाज के बीच कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभा चुके आईएएस नीरज के. पवन ने गुर्जरों के नेता किरोड़ी बैंसला से वार्ता के प्रयास शुरू किए। शाम को अंततः गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी के साथ  उसकी मांगें मानने के लिए 13 दिनों का वक्त दिया।

त्योहारी सीजन को देखते हुए दिया समय

किरोडी़ बैंसला ने कहा कि खेती- बाड़ी के काम एवं त्योहारी सीजन को देखते हुए समिति ने सरकार को एक नवंबर तक का समय दिया है। उसके बाद भी अगर मांगों पर काम नहीं हुआ तो समाज आकर पटरी पर बैठ जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से वार्ता के लिए आए अधिकारी कोई ठोस प्रस्ताव लेकर नहीं आए। उल्लेखनीय है कि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में आरक्षण को केंद्र की नौवीं अनुसूची में शामिल करवाना, बैकलॉग की भर्तियां निकालने व प्रक्रियाधीन भर्तियों में पूरे पांच प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिये जाने की बात है।

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