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असदुद्दीन ओवैसी के नाम से राजस्थान में शुरू हुई हिन्दु-मुसलमान की राजनीति

कारोबार

कांग्रेस ने शुरूआत की तो भाजपा भी उतरी मैदान में

जयपुर। पूरे देश में राजस्थान एक शांत प्रदेश के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के नाम ने यहां की शांत राजनीति में अशांति फैला दी है। हालांकि प्रदेश में हिन्दु-मुसलमान की राजनीति होती रही है, लेकिन यह हमेशा ढंके-छिपे हुई। सभी दलों के राजनेता अपने बयानों में हिन्दु-मुसलमान करने से झिझकते थे। अब समय बदल गया है और छह शहरों में हुए नगर निगम चुनावों के बाद अब यहां खुलकर हिन्दु-मुसलमान होने लगा है।

इसकी शुरूआत कांग्रेस की ओर से की गई। कांग्रेस ने नगर निगमों में अपने बोर्ड बनाने के लिए अल्पसंख्यक वर्ग को ध्यान में रखते हुए पहले वार्डों का परिसीमन किया और बाद मे तीनों शहरों में दो-दो नगर निगम बना दिए। इस कवायद से कांग्रेस को अल्पसंख्य वर्ग के वोटों के कारण चार निगमों में बोर्ड बनाने का मौका मिल गया, लेकिन मुस्लिम महापौर नहीं बनाने के कारण सारे किए धरे खेल पर पानी फिर गया। भाजपा ने इस खेल को समझा और अब वह भी मैदान में उतर गई है और भाजपा नेताओं ने हिन्दु-मुसलमान करना शुरू कर दिया है।

क्लियर न्यूज ने बुधवार को ‘राजस्थान में भाजपा ने शुरू किया अल्पसंख्यकों को कांग्रेस से दूर करने का काम ‘ खबर प्रकाशित कर बताया था कि भाजपा प्रदेश में अल्पसंख्यक वर्ग को कांग्रेस से दूर करने का प्रयास करेगी। ऐसे में कांग्रेस अल्पसंख्यक वर्ग को खुश करने का काम करेगी और भाजपा कांग्रेस पर तुष्टीकरण के आरोप लगाकर बयानबाजी शुरू कर देगी। भाजपा इस तरह का माहौल खड़ा करेगी कि यहां की सभी खबरें ओवैसी के पास पहुंचेगी और वह राजस्थान की ओर आकर्षित हो जाएंगे। भाजपा ने इसके लिए पूरी योजना तैयार कर ली है।

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी

भाजपा सूत्रों का कहना है कि जब बात निकली है तो दूर तकल जाएगी। कांग्रेस ने प्रदेश में हिन्दु-मुसलमान की राजनीति शुरू की है तो अब कांग्रेस को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा। भाजपा ने अगले विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस को इसी में घेरने की योजना तैयार की है। गौ हत्या, लव जिहाद, तुष्टीकरण, सांप्रदायिकता, मेवात इलाके में तनाव, धर्मांतरण, हिन्दु देवी-देवताओं के अपमान जैसे मामलों में अभी तक भाजपा के नेता बोलने से बचते थे, लेकिन अब भाजपा द्वारा ऐसे मामलों में खुलकर बोलने की रणनीति है, ताकि प्रदेश में हिन्दु-मुस्लिम का माहौल बने।

कांग्रेस इसका विरोध करेगी तो उसे यह कहकर चुप करवा दिया जाएगा कि इसकी शुरूआत कांग्रेस ने ही की है। ऐसे में जब प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच हिन्दु-मुस्लिम को लेकर बयानबाजी होगी तो माहौल बनेगा और यह बात ओवैसी तक भी जाएगी। भाजपा यही चाहती है कि ओवैसी खुद चलकर राजस्थान आएं। भाजपा ने यह रणनीति उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, बंगाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड़, महाराष्ट्र के वर्तमान राजनीतिक परिदृष्य को देखकर तैयार की है, जहां सीएए-एनआरसी प्रकरण के बाद से खुलकर हिन्दु-मुसलमान होने लगा और हिन्दु वोटों का ध्रुविकरण भाजपा की ओर होने लगा।

राजनीति को साम्प्रदायिकता की तरफ मोड़ना चाहते हैं गहलोत

खबर प्रकाशित होने के साथ ही भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी खुलकर मैदान में आ गए हैं। चतुर्वेदी ने गुरुवार को कांग्रेस पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। चतुर्वेदी ने मीडिया में बयान दिया कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह से साम्प्रदायिक एजेंडों पर चल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरोप लगाया कि वह प्रदेश की राजनीति को साम्प्रदायिकता की ओर मोड़ना चाहते हैं और प्रदेश की मौजूदा समस्याओं पर ध्यान देने के बजाए साम्प्रदायिक विषयों को लाकर मूल विषयों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें तुष्टीकरण की राजनीति बंद करनी चाहिए। लव जिहाद के ऊपर जब कानून बनाने की बात होती है, तो राजस्थान के मुख्यमंत्री कहते हैं कि यह असंवैधानिक है, यदि सरकार ने लव जिहाद पर कानून नहीं बनाया तो भाजपा की सरकार बनने पर लव जिहाद को रोकने के लिए प्रदेश में कानून बनाया जाएगा।

ओवैसी आएं और राजस्थान में चुनाव लड़ें

ओवैसी के सवाल पर चतुर्वेदी ने कहा मेरा स्पष्ट मानना है कि लोकतंत्र में राजनैतिक दल बनाने का अधिकार है, अपने विषयों को रखने का अधिकार है, अपने विषयों को रखकर कोई भी दल बनाकर कहीं भी चुनाव लड़ सकता है। ओवैसी जो भाषा बोलते हैं, वो ही भाषा राहुल गांधी बोलते हैं और अब उसी भाषा को अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी बोल रहे हैं, इसलिए उनकी भाषा में एक ही शब्दकोष है। ओवैसी राजस्थान आएं और चुनाव लडें, यह उनका अधिकार है।

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