Inspection of legal metrology team, action on companies trading canned goods without registration, seizing 48 unverified electric weighing machines

विधिक माप विज्ञान टीम का निरीक्षण, बिना पंजीयन डिब्बाबंद वस्तुओं का व्यापार करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई, 48 असत्यापित इलैक्ट्रिक कांटे जप्त

जयपुर

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए विधिक माप विज्ञान टीम के राज्य स्तरीय दल द्वारा जयपुर शहर में फ्रेश फ्रूट कंपनी मुहाना मंडी व वैभव ग्लोबल लिमिटेड ई.पी.आई.पी. सीतापुरा की जांच की गई। टीम को जांच के दौरान फ्रेश फ्रूट कंपनी पर डिब्बाबंद वस्तुओं का व्यापार बिना पंजीयन पाए जाने और वैभव ग्लोबल लिमिटेड पर 48 असत्यापित इलैक्ट्रिक कांटे मिलनेे सम्बंधी अनियमितता पर व्यापारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई।

उपभोक्ता मामले विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने बताया कि विधिक माप विज्ञान की टीम ने फ्रेश फ्रूट कम्पनी, मुहाना मण्डी पर फर्म द्वारा इम्पोर्टेड फलों की पैकेजिंग का कार्य किया जा रहा था, लेकिन फर्म के पास वस्तुओं को पैक किये जाने के सम्बन्ध में पैकेज्ड कमोडिटीज रूल्स 2011 के तहत विभाग में पंजीयन नहीं होना मिला।

नियमानुसार पैकेट के 40 फीसदी हिस्से पर पढ़ने लायक फॉन्ट साइज में निर्माता का नाम, पैकेजर, आयातक, उत्पाद की शुद्ध मात्रा, उत्पाद के निर्माण की तिथि, खुदरा बिक्री मूल्य और उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर को प्रदर्शित करना आवश्यक है। साथ ही विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ में पंजीयन कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि फर्म पर पैकिंग में काम में लिए जा रहे इलेक्ट्रिक कांटों का भी सत्यापन नहीं होना मिला जिस पर टीम द्वारा दो असत्यापित इलेक्ट्रिक कांटों को जब्त किया गया।

टीम जब वैभव ग्लोबल लिमिटेड ई.पी.आई.पी. सीतापुरा पहुंची तो वहां पर 48 इलेक्ट्रिक कांटों का उपयोग निर्मित ज्वैलरी का वजन तौलने में किया जाना मिला, साथ ही ये सभी कांटे असत्यापित मिले। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर असत्यापित इलेक्ट्रिक काटों को जब्त किये जाने का प्रावधान है, लेकिन फर्म पर निरीक्षण कराने वाले इंचार्ज प्रभास कुमार झा द्वारा जब्ती के लिए कांटों को प्रस्तुत नहीं किया।

विधिक माप विज्ञान अधिनियम की धारा 15 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करने में बाधा पहुंचाई। इस सम्बन्ध में अलग से कार्रवाई की जा रही है। असत्यापित 48 इलेक्ट्रिक कांटों को जब्ती हेतु प्रस्तुत नहीं किये जाने के कारण फर्म को इन असत्यापित पाए गए कांटों का नियमानुसार सत्यापन होने के बाद ही प्रयोग में लिए जाने के निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम 2011 के नियम 23 में व्यापारी की जिम्मेदारी है कि उनके द्वारा काम में लिए जाने वाले माप तौल के साधनों को प्रतिवर्ष सत्यापित करा कर ही उपयोग में ले। बिना पंजीयन के वस्तुओं को पैक करके बेचे जाने पर 5 हजार रुपए तक और पैकेट पर नियमानुसार प्रदर्शन नहीं मिलने पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाता है।

किसी भी असत्यापित बाट के प्रयोग व विक्रय करने पर दोषियों के विरुद्ध 2 से 10 हजार रुपए जुर्माना के अतिरिक्त दूसरी बार अथवा पुनरावृत्ति की अवस्था में आर्थिक दंड के साथ एक वर्ष के कारावास के दंड का भी प्रावधान है।

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